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FBI चीफ काश पटेल का ईमेल हैक, निजी डेटा लीक के दावे से अमेरिका में हड़कंप
जारी किए गए ईमेल्स 2010 से 2022 के बीच के बताए जा रहे हैं. इस दौरान काश पटेल ने पब्लिक डिफेंडर, फेडरल प्रॉसीक्यूटर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
अमेरिका में एक बड़े साइबर हमले का मामला सामने आया है, जहां फेडरेशन ब्यरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (FBI) काश पटेल के निजी ईमेल अकाउंट को हैक करने का दावा किया गया है. ईरान समर्थित बताए जा रहे हैकर समूह ने कई निजी जानकारियां लीक करने की बात कही है, हालांकि अमेरिकी एजेंसियों ने इसे पुराना और गैर-सरकारी डेटा बताया है.
निजी ईमेल में सेंध, संवेदनशील जानकारी लीक का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकर समूह ने काश पटेल के निजी ईमेल अकाउंट में घुसपैठ कर कई ईमेल और दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं. लीक डेटा में यात्रा से जुड़ी जानकारी, वॉशिंगटन में लीजिंग एजेंट्स के साथ बातचीत और कुछ निजी अकाउंट डिटेल्स शामिल बताई जा रही हैं. इन ईमेल्स में पटेल की निजी तस्वीरें और परिवार व सहयोगियों के साथ बातचीत भी सामने आई है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
FBI का बयान. डेटा पुराना, सरकारी जानकारी सुरक्षित
FBI ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें निदेशक के निजी ईमेल को निशाना बनाए जाने की जानकारी है. एजेंसी के अनुसार, लीक किया गया डेटा पुराना है और इसमें किसी भी संवेदनशील सरकारी जानकारी का उल्लंघन नहीं हुआ है. FBI ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कोई जानकारी प्रभावित नहीं हुई है.
ईरान समर्थित हैकर समूह ‘हैंडाला’ पर आरोप
इस साइबर हमले की जिम्मेदारी ‘हैंडाला’ नामक हैकर समूह ने ली है. अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, यह समूह ईरान का खुफिया मंत्रालय से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि FBI ने हाल ही में इस समूह की वेबसाइट को बंद भी किया था. इससे पहले यह समूह अमेरिकी मेडिकल टेक कंपनी Stryker Corporation पर साइबर हमला कर चुका है.
1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित
अमेरिकी विदेश विभाग के ‘Rewards for Justice’ कार्यक्रम के तहत इस हैकर समूह की पहचान बताने वालों के लिए 1 करोड़ डॉलर तक के इनाम की घोषणा की गई है. हैकर्स ने भी इस इनाम का जिक्र करते हुए दावा किया है कि उनके पास काश पटेल के 320 से अधिक निजी ईमेल मौजूद हैं.
पुराने ईमेल्स में कई अहम खुलासे
जारी किए गए ईमेल्स 2010 से 2022 के बीच के बताए जा रहे हैं. इस दौरान काश पटेल ने पब्लिक डिफेंडर, फेडरल प्रॉसीक्यूटर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया था. ईमेल्स में विदेश यात्राओं, वित्तीय गतिविधियों और सरकारी कार्यकाल के दौरान किए गए खर्चों से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमले अक्सर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर उन्हें बदनाम करने की रणनीति का हिस्सा होते हैं. मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस घटना को एक बड़े साइबर युद्ध के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.
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