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नई योजनाओं से निर्यातकों को राहत, कैबिनेट ने ₹45,060 करोड़ के पैकेज को दी मंजूरी

कैबिनेट की मंजूरी से उम्मीद है कि भारत के निर्यात क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और एमएसएमई इकाइयों को आर्थिक मजबूती हासिल होगी. यह पहल न केवल अल्पकालिक राहत बल्कि दीर्घकालिक निर्यात वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

भारत सरकार ने निर्यातकों, खासकर एमएसएमई क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ₹45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य अमेरिकी शुल्क बढ़ोतरी से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता और संरक्षण प्रदान करना है.

निर्यात संवर्धन मिशन को नई गति

केंद्र ने 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission - EPM) को हरी झंडी दी है. यह मिशन भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित होगा. यह योजना वित्त वर्ष 2031 तक जारी रहेगी और इसे दो उप-योजनाओं ‘निर्यात प्रोत्साहन’ (₹10,401 करोड़) और ‘निर्यात दिशा’ (₹14,659 करोड़) के तहत लागू किया जाएगा. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह मिशन निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को व्यापक सहयोग देगा.

निर्यात प्रोत्साहन’ के तहत वित्तीय सहायता

‘निर्यात प्रोत्साहन’ उप-योजना में ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड सुविधा और नए बाजारों के लिए ऋण वृद्धि सहायता जैसे उपाय शामिल होंगे. इसका उद्देश्य निर्यातकों को कार्यशील पूंजी और वित्तीय लचीलापन प्रदान करना है.

‘निर्यात दिशा’ के जरिए गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर फोकस

‘निर्यात दिशा’ उप-योजना गैर-वित्तीय क्षमताओं के विकास पर केंद्रित होगी. इसमें अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग सहायता, व्यापार मेलों में भागीदारी, परिवहन प्रतिपूर्ति और व्यापार खुफिया जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा.

ऋण गारंटी योजना की अवधि बढ़ी

कैबिनेट ने निर्यातकों के लिए ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGSE) की अवधि को 31 मार्च 2026 तक बढ़ाने का भी निर्णय लिया है. इस योजना के तहत पात्र निर्यातकों को स्वीकृत सीमा के 20% तक की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी बिना रेहन के दी जाएगी. 50 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ऋण गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी के माध्यम से लागू किया जाएगा. योजना की निगरानी वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी.

अमेरिकी शुल्क बढ़ोतरी के बीच राहत का कदम

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 50% तक का भारी शुल्क लगा दिया है. सरकार का यह कदम न केवल प्रभावित निर्यातकों को राहत देगा, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करेगा.

 


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