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बैंकिंग सेक्टर में 13.8 प्रतिशत क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान, मार्जिन स्थिर रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है. बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती क्रेडिट विस्तार की गति को प्रभावित कर सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत के बैंकिंग सेक्टर में आने वाले समय में मजबूत क्रेडिट ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है. हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर हल्का दबाव देखने को मिल सकता है. Systematic Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर में एडवांस ग्रोथ कई सेगमेंट्स में मजबूत बनी हुई है.

13.8 प्रतिशत तक पहुंची क्रेडिट ग्रोथ

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 के मध्य तक सिस्टम स्तर पर एडवांस में सालाना आधार पर 13.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तीसरी तिमाही के अंत में बनी ग्रोथ की रफ्तार चौथी तिमाही में भी जारी रही है. जिससे सेक्टर में मजबूती का संकेत मिलता है.

आगे धीमी पड़ सकती है रफ्तार

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है. बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती क्रेडिट विस्तार की गति को प्रभावित कर सकती है. इससे FY26 में देखी गई तेज ग्रोथ में कुछ नरमी आ सकती है.

बैंकों की कमाई में होगा सुधार

रिपोर्ट के मुताबिक. बैंकिंग सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी में सालाना आधार पर सुधार होने की उम्मीद है. इसमें लगातार एडवांस ग्रोथ. फीस इनकम में बढ़ोतरी और कम क्रेडिट कॉस्ट अहम भूमिका निभाएंगे.

नेट इंटरेस्ट मार्जिन रहेगा स्थिर

नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर हल्का दबाव रह सकता है. लेकिन कुल मिलाकर यह स्थिर रहने की संभावना है. रिपोर्ट के अनुसार. चौथी तिमाही में मार्जिन सीमित दायरे में रहेगा. इसमें ब्याज दरों में पहले की कटौती का प्रभाव और डिपॉजिट रीप्राइसिंग का असर शामिल होगा. सीक्वेंशियल आधार पर NIM -5 बेसिस पॉइंट से +2 बेसिस पॉइंट के बीच रह सकता है. जिससे मार्जिन में बड़ी बढ़त की संभावना कम दिखती है.

क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ में अंतर

रिपोर्ट में एक अहम ट्रेंड की ओर इशारा किया गया है. क्रेडिट ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से तेज बनी हुई है. जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर करीब 83 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यह स्थिति बैंकों की लिक्विडिटी मैनेजमेंट रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है.

एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन जोखिम बरकरार

अनसिक्योर्ड लोन सेगमेंट में सुधार देखने को मिल रहा है. स्ट्रेस लेवल कम हो रहे हैं और निकट भविष्य में स्लिपेज नियंत्रण में रहने की उम्मीद है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाली तिमाहियों में स्लिपेज बढ़ सकते हैं. जिससे क्रेडिट कॉस्ट पर दबाव आ सकता है.

बैंकिंग सेक्टर का आउटलुक संतुलित नजर आता है. नेट इंटरेस्ट मार्जिन स्थिर या थोड़ा बेहतर रह सकता है. वहीं. क्रेडिट कॉस्ट में हल्की बढ़ोतरी संभव है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चुनिंदा बैंक मजबूत ग्रोथ और बेहतर कमाई के चलते बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं.


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