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सरकारी बकाया की वसूली: एस्सेल ग्रुप को 600 करोड़ रुपये मिले, आगे और 1,200 करोड़ मिलने की उम्मीद
मुख्य रूप से यह वसूली महाराष्ट्र की नगरपालिका इकाइयों से हुई है, जिनके साथ एस्सेल ग्रुप ने पहले सियोन-पनवेल हाईवे जैसी परियोजनाओं पर काम किया था. इसके अलावा, मध्य प्रदेश और हरियाणा की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) से भी राशि वसूल की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सुभाष चंद्रा के नेतृत्व वाले एस्सेल ग्रुप को राज्य सरकारों से लगभग 600 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली हुई है. यह वसूली गुरुवार को हुई और इससे परिचित सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तक परिवार को अगले डेढ़ साल में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की और वसूली की पूरी उम्मीद है.
मुख्य रूप से यह वसूली महाराष्ट्र की नगरपालिका इकाइयों से हुई है, जिनके साथ एस्सेल ग्रुप ने पहले सियोन-पनवेल हाईवे जैसी परियोजनाओं पर काम किया था. इसके अलावा, मध्य प्रदेश और हरियाणा की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) से भी राशि वसूल की गई है. सूत्रों के अनुसार, यह भुगतान “लगातार चर्चाओं, फॉलो-अप और कुछ रियायतों” के जरिए संभव हुआ है.
2019 से लंबित भुगतान, कर्ज में डूबा था समूह
एस्सेल ग्रुप 2019 से ही इन भुगतानों की वसूली का प्रयास कर रहा था. उस समय समूह पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था. 2020 में, समूह को Zee Entertainment Enterprises में गिरवी रखे हुए शेयरों का एक हिस्सा बेचना पड़ा, जिसे सुभाष चंद्रा अक्सर अपने कारोबार की “कीमती संपत्ति” कहा करते थे.
इस सौदे के बाद, चंद्रा की व्यक्तिगत हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 3.99% रह गई थी.
91% कर्ज चुका चुका है समूह
2021 तक, एस्सेल ग्रुप ने अपने कुल कर्ज का 91 प्रतिशत से अधिक चुका दिया था. इसके लिए समूह ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, और सड़क परियोजनाओं जैसे कई कारोबारों से अपने हिस्से बेचे.
हालांकि प्रवर्तक परिवार अभी भी कुछ अन्य भुगतानों की वसूली में जुटा है, लेकिन अब तक यह तय नहीं हुआ है कि वसूली गई राशि का निवेश कहां किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, परिवार वर्तमान कंपनियों में संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहा है.
Pinewz ऐप से डिजिटल वापसी की तैयारी
पिछले बयानों में सुभाष चंद्रा ने यह संकेत दिया था कि वे ऐसे नए व्यवसाय में कदम रखेंगे, जो ZEE के कारोबार से टकराव न करें। उनका ध्यान डिजिटल वीडियो और वीडियो से जुड़े एआई/एमएल (Artificial Intelligence / Machine Learning) आधारित व्यवसायों पर है. उन्होंने हाल ही में Pinewz नाम का एक AI-आधारित न्यूज ऐप लॉन्च करने की बात कही थी, जिसमें कोई भी उपयोगकर्ता किसी भी शहर या गांव की खबरें सिर्फ पिनकोड डालकर पा सकता है.
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