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RBI की सख्ती का दिखा असर, NBFC को बैंक लोन देने की वृद्धि में आई 11 प्रतिशत गिरावट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों (Banks) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) से मुनाफे की अंधी दौड़ के पीछे भागने से बचने की सलाह दी है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को बेवजह के ‘मुनाफे की तलाश’ और ग्रोथ का पीछा करते हुए ऐसे रिस्क लेने से बचने का आग्रह किया है. दरअसल, आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है मुनाफे की अंधी दौड़ के पीछे भागने से पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है.  उनका कहना है कि ग्रोथ ऐसी होनी चाहिए जिसमें रिस्क को कम करने का स्ट्रक्चर शामिल हो. 

आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कुछ लाभ वाले बिजनेस मॉडल में ऐसी छिपी हुई कमजोरियां हो सकती हैं, जिनमें प्रॉ‌फिट ऐसे रिस्क को मैनेज करने से आए. लेकिन ग्रोथ ऐसी हो, जिसमें रिस्क को कम करने का स्ट्रक्चर शामिल हो, वरना इसकी कीमत बहुत बड़ी हो सकती है. दास ने कहा कि आरबीआई के भीतर उच्च डिफॉल्ट दरों की संभावना और वित्तीय प्रणाली पर समग्र प्रभाव के बारे में चिंताएं बढ़ी हैं. 

AI और मशीन लर्निंग को अपनाए 

आरबीआई कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर्स में वित्तीय मजबूती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गवर्नर ने वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए आर्टिफिशियल (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत और उभरती टेक्नॉलजी को अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर मुख्य मानदंड अच्छे दिख रहे हैं, लेकिन मानकों में ढील, उचित वैल्यूएशन का अभाव और कुछ लोन देने वालों के बीच अनसिक्योर्ड लोन को बढ़ावा देने के लिए अंधी दौड़ में शामिल होने की मानसिकता के साफ सुबूत हैं. 

अनसिक्योर्ड लोन ग्रोथ की रफ्तार हुई धीमी
गवर्नर ने कहा कि बीते दिनों आरबीआई द्वारा की गई कार्रवाई का सही असर पड़ा है. अनसिक्योर्ड लोन बढ़ने की रफ्तार धीमी हुई है. क्रेडिट कार्ड सेक्‍टर में ग्रोथ आरबीआई की कार्रवाई से पहले के 30 प्रतिशत से घटकर अब 23 प्रतिशत हो गई है, जबकि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को बैंक लोन देने की वृद्धि पहले के 29 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गई है. गवर्नर ने कहा कि भारत का घरेलू वित्तीय तंत्र अब कोविड संकट के दौर में प्रवेश करने से पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है, जिसका सबूत मजबूत पूंजी पर्याप्तता और बैंकों और NBFC की हेल्दी प्रॉफ‌िट हैं.

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