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Q3 FY26 में ECOS की मजबूत बढ़त, 22.48% बढ़ा ऑपरेशनल रेवेन्यू
प्रबंधन के अनुसार कंपनी तकनीक-आधारित मोबिलिटी रणनीति पर फोकस बनाए रखेगी और कॉर्पोरेट मैनेज्ड मोबिलिटी सेक्टर में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत की प्रमुख कॉरपोरेट मैनेज्ड मोबिलिटी और हॉस्पिटैलिटी प्रदाता ECOS (India) Mobility & Hospitality Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही और नौ महीने की बिना ऑडिट वाली वित्तीय रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट 31 दिसंबर 2025 को समाप्त अवधि पर आधारित है.
तीसरी तिमाही का प्रदर्शन
तीसरी तिमाही में संचालन से राजस्व ₹2,060.71 मिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 22.48% अधिक है. यह वृद्धि ट्रिप की संख्या में बढ़ोतरी और प्रीमियम व लक्जरी सेवाओं की बेहतर मांग के कारण दर्ज की गई.
EBITDA 8.05% बढ़कर ₹233.55 मिलियन हो गया. हालांकि, बढ़ती वेरिएबल लागत और अतिरिक्त वॉल्यूम से जुड़े खर्चों के कारण मार्जिन पर कुछ दबाव देखने को मिला. EBITDA मार्जिन घटकर 11.33% रहा, जो पिछले वर्ष 12.85% था.
कर के बाद लाभ (PAT) ₹139.43 मिलियन रहा, जो सालाना आधार पर 9.12% की वृद्धि दर्शाता है. यह वृद्धि मजबूत राजस्व प्रदर्शन और स्थिर परिचालन क्षमता के कारण संभव हुई.
नौ महीने का प्रदर्शन
नौ महीने की अवधि में संचालन से कुल राजस्व ₹6,013.98 मिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26.15% अधिक है. यह वृद्धि कंपनी के विभिन्न बिजनेस सेगमेंट्स में लगातार बनी मजबूत मांग को दर्शाती है.
इस अवधि में EBITDA 5.85% बढ़कर ₹697.76 मिलियन हो गया. हालांकि, कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि, फ्लीट विस्तार और कुछ एकमुश्त खर्चों के कारण मार्जिन में कमी दर्ज की गई. EBITDA मार्जिन 11.60% रहा, जो पिछले वर्ष 13.83% था.
कर के बाद लाभ ₹418.40 मिलियन रहा, जो पिछले वर्ष ₹420.30 मिलियन के लगभग बराबर है. अधिक मूल्यह्रास और परिचालन लागत के कारण लाभ में वृद्धि सीमित रही.
प्रबंधन की प्रतिक्रिया
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश लूम्बा ने कहा कि कंपनी ने Q3 FY26 में 22.48% की मजबूत सालाना राजस्व वृद्धि दर्ज की, जो कॉर्पोरेट मोबिलिटी सेवाओं में लगातार बनी मांग को दर्शाती है. उन्होंने बताया कि नौ महीने की अवधि में 26.15% की वृद्धि कंपनी के बिजनेस मॉडल की मजबूती का संकेत है.
उन्होंने यह भी कहा कि मार्जिन में आई कमी योजनाबद्ध निवेश और विस्तार से जुड़ी लागत के कारण है. कंपनी ने प्राइसिंग सुधार, लागत अनुकूलन और बेहतर उपयोग दर बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे आने वाले समय में मार्जिन में सुधार की उम्मीद है.
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