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दिवाली से पहले इकॉनमी ने पकड़ी रफ्तार : डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 6% की बढ़ोतरी
इस त्योहारी सीजन में जहां आम जनता खरीदारी की तैयारियों में जुटी है, वहीं सरकार को भी टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर उम्मीद से बेहतर रिजल्ट्स मिल रहे हैं. इससे अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए अच्छी खबर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
दिवाली से ठीक पहले भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक राहतभरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक यानी 12 अक्टूबर तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 6.33% की वृद्धि दर्ज की गई है. इस दौरान कुल टैक्स संग्रह 11.89 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है.
कॉरपोरेट टैक्स में उछाल और रिफंड में गिरावट बनी वजह
इस वृद्धि का मुख्य कारण कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में इजाफा और रिफंड्स में कमी है. इस अवधि में जारी किए गए टैक्स रिफंड्स में 16% की गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर 2.03 लाख करोड़ रुपये रह गए. वहीं, शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 5.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 4.92 लाख करोड़ रुपये था.
पर्सनल इनकम टैक्स और STT में भी बढ़ोतरी
नॉन-कॉरपोरेट टैक्स यानी पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन भी बेहतर रहा. इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 6.56 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 5.94 लाख करोड़ रुपये था. इसके साथ ही प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) से 30,878 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो पिछले साल के 30,630 करोड़ रुपये से थोड़ी अधिक है.
कितना है सरकार का टैक्स कलेक्शन टारगेट?
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 25.20 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन टारगेट रखा है, जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 12.7% अधिक है. अभी तक (12 अक्टूबर तक) सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) 13.92 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो सालाना आधार पर 2.36% की बढ़ोतरी को दर्शाता है.
क्या कहता है आंकड़ों का ट्रेंड?अब तक के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार अपने टैक्स कलेक्शन टारगेट की ओर सकारात्मक गति से बढ़ रही है. अगर यही रफ्तार बनी रही, तो वित्त वर्ष के अंत तक सरकार लक्ष्य को पार भी कर सकती है, जिससे फिस्कल डेफिसिट कम करने और पब्लिक इन्वेस्टमेंट बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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