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FDI नियमों में ढील से भारत की मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन को बढ़ावा: क्रिसिल

रिपोर्ट के अनुसार संशोधन से निकट अवधि में निवेश में मामूली वृद्धि होगी, लेकिन लंबी अवधि में यह भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में व्यापक बदलाव की नींव रख सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत ने पड़ोसी देशों के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों में ढील दी है, जिसे मध्य से लंबी अवधि में तकनीकी साझेदारियों और मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है. यह जानकारी क्रिसिल इंटेलीजेंस (Crisil Intelligence) की एक इम्पैक्ट रिपोर्ट में सामने आई है.

FDI नियमों में बदलाव

सरकार ने अप्रैल 2020 में कोविड-19 के दौरान अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए नियमों में संशोधन किया था. नए बदलावों के तहत 10 प्रतिशत तक के अल्पसंख्यक निवेश के लिए ऑटोमैटिक अप्रूवल दिया जाएगा, जिसमें नियंत्रण शामिल नहीं होगा. इसके अलावा, पूंजीगत सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स जैसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों के लिए 60 दिन की मंजूरी विंडो भी पेश की गई है.

Crisil Intelligence के अनुसार, तुरंत प्रभाव सीमित हो सकता है और केवल लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने में मदद मिलेगी, लेकिन समय के साथ अधिक महत्वपूर्ण लाभ सामने आएंगे क्योंकि नियामक स्पष्टता बढ़ेगी और सीमा-पार सहयोग तेज होगा.

मध्यम और लंबी अवधि में प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है, “संशोधन का असली प्रभाव मध्यम से लंबी अवधि में दिखाई देगा.” इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में विलय और अधिग्रहण, जॉइंट वेंचर और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

चीन और हांगकांग से निवेश में वृद्धि

ढील से चीन और हांगकांग से निवेश में पुनः वृद्धि होने की संभावना है. 2020 से पहले, चीन का भारत के कुल FDI में हिस्सा लगभग 2 प्रतिशत था, लेकिन 2020-2025 के दौरान यह केवल 0.27 प्रतिशत रह गया था. Crisil Intelligence के अनुसार, अब यह हिस्सा 2 प्रतिशत से ऊपर लौट सकता है क्योंकि अनुमोदन तेजी से और पूर्वानुमेय तरीके से किए जाएंगे.

उभरते निर्माण क्षेत्रों में महत्व

समयबद्ध अनुमोदन विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन और वेफर प्रोडक्शन जैसे उभरते मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं. यह भारतीय और चीनी कंपनियों को जॉइंट वेंचर स्थापित करने, पूंजी और उन्नत तकनीक तक बेहतर पहुंच बनाने में मदद करेगा.

घरेलू निर्माण को सशक्त बनाना

इस तरह की साझेदारियां भारत के घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करने और उच्च-मूल्य क्षेत्रों में आयात निर्भरता कम करने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण हैं.

पुराने नियमों के दौरान निवेश बाधाएं

वित्तीय वर्ष 2021 और 2022 के बीच प्रेस नोट 3 के तहत 75,691 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन केवल 13,625 करोड़ रुपये को मंजूरी मिली. इन बाधाओं ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसे प्रमुख योजनाओं पर भी असर डाला.

नियमों में ढील से निवेश योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और पूंजी प्रवाह में रुकावटें कम होंगी. Crisil Intelligence ने चीन के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी साझेदारियों के साथ बड़े पैमाने पर FDI प्रवाह ने चीन की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया.

रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत इसी तरह की रणनीति अपनाता है तो यह वैश्विक वैल्यू चेन में अधिक गहराई से शामिल हो सकता है और कंपनियों को पारंपरिक हब से बाहर आपूर्ति श्रृंखला विविधिकरण का अवसर मिलेगा.

 


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