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DPS : भारत का फाइनेंशियल GPS, जिसने ₹50,000 करोड़ के स्टॉक मार्केट घोटालों का किया खुलासा

आईआरएस अधिकारी ध्रुव पुरारी सिंह (DPS) टैक्स विभाग के जीपीएस हैं, जिन्होंने फाइनेंशियल फॉरेंसिक की अपनी कला से भारी मात्रा में अवैध संपत्ति का पर्दाफाश किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

पलक शाह

एक रोमांचक ब्लॉकबस्टर थ्रिलर को मात देने वाले इस वित्तीय मैनहंट में, भारत के आयकर विभाग ने, आईआरएस अधिकारी ध्रुव पुरारी सिंह (जिन्हें डीपीएस के नाम से जाना जाता है) के नेतृत्व में, रूपक रूप से तैयार किए गए "डीपीएस ट्रैकर" की मदद से ₹50,000 करोड़ (यूएसडी 6 बिलियन) के स्टॉक मार्केट घोटालों का पर्दाफाश किया है.

जीपीएस पर एक शब्द-खेल करते हुए, डीपीएस ट्रैकर सिंह के अत्याधुनिक दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो एल्गोरिदमिक सटीकता, लेजर फॉरेंसिक और डेटा-आधारित खुफिया जानकारी को मिलाकर टैक्स चोरों और मनी लॉन्डरर्स को सटीकता से पकड़ने का काम करता है. इस ऐतिहासिक कार्रवाई, जिसमें दो बड़े घोटालों प्रोजेक्ट एलटीसीजी और प्रोजेक्ट फाल्कन का भंडाफोड़ किया गया, ने न केवल छिपाया गया राजस्व वसूल किया बल्कि भारत को पूंजी बाजार में धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में ला खड़ा किया है.

डीपीएस ट्रैकर: अवैध संपत्ति के लिए एक वित्तीय जीपीएस
जीपीएस को भूल जाइए, यह है डीपीएस ट्रैकर, एक क्रांतिकारी जांच विधि जिसे ध्रुव पुरारी सिंह के नाम पर रखा गया है, जिनके नाम के अक्षर अब वित्तीय पारदर्शिता के पर्याय बन चुके हैं. जैसे एक ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम स्थानों को खोजता है, वैसे ही डीपीएस ट्रैकर शेल कंपनियों, स्टॉक ट्रेड्स और बैंकिंग चैनलों के जरिए जटिल धन प्रवाह को ट्रैक करता है, जिससे कोई भी वित्तीय ठिकाना छिपा नहीं रह पाता. “डीपीएस ट्रैकर का मतलब है पैसे का पीछा करना, चाहे वो कितनी भी चालाकी से छिपाया गया हो,” सिंह ने कहा, जब उन्होंने इन जटिल घोटालों को उजागर करने के अपने तरीके का वर्णन किया. फाइनेंशियल फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य में उनकी विशेषज्ञता ने आयकर विभाग को वित्तीय अपराधों के खिलाफ एक मजबूत बल में बदल दिया है, और उनकी हालिया जीत ने ₹50,000 करोड़ के स्टॉक मार्केट फ्रॉड को उजागर किया है.

प्रोजेक्ट एलटीसीजी: ₹38,000 करोड़ के पेनी स्टॉक षड्यंत्र का पर्दाफाश
पहला ऑपरेशन, प्रोजेक्ट एलटीसीजी, एक जटिल घोटाले को निशाना बनाता है जो भारत की अब रद्द की गई धारा 10(38) का फायदा उठा रहा था, जो सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) को कर से मुक्त करती थी. सिंडिकेट्स, जो वित्तीय कठपुतली संचालन की तरह काम कर रहे थे, ने शेल कंपनियों का उपयोग करके पेनी स्टॉक्स—ऐसी कंपनियों के नगण्य मूल्य वाले शेयर जिनकी व्यावसायिक गतिविधियाँ लगभग शून्य थीं—को सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए 12 से 18 महीनों में कृत्रिम रूप से बढ़ाया. फिर इन शेयरों को संबंधित संस्थाओं को ऊँचे दामों पर बेचा गया, और "लाभ" को कर-मुक्त एलटीसीजी के रूप में दिखाया गया, जबकि शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉसेज़ (STCL) को कर योग्य आय को ऑफसेट करने के लिए तैयार किया गया.

घोटाले का पैमाना चौंकाने वाला है:
- 84 पेनी स्टॉक स्क्रिप्स में हेरफेर किया गया.
- 64,811 पैन धारकों ने ₹38,387 करोड़ की फर्जी एलटीसीजी का दावा किया.
- 43,154 पैन धारकों ने ₹38,149 करोड़ की STCL उत्पन्न की.
- ₹1,575 करोड़ की नकद लेन-देन को बैंकिंग और अकाउंटिंग जांच के जरिए ट्रैक किया गया.

डीपीएस ट्रैकर ने केवल पैसे का पीछा नहीं किया, बल्कि इस घोटाले को रिवर्स-इंजीनियर किया. अलिक्विड स्टॉक्स में मूल्य-और-वॉल्यूम विसंगतियों का विश्लेषण करके, व्यापारियों और दलालों को मैप करके, और केवाईसी विसंगतियों को नकदी प्रवाह से जोड़कर, डीपीएस और उनकी टीम ने इस घोटाले का एक फॉरेंसिक मैप तैयार किया, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तरह की पहली कोशिश थी. प्रमुख दलालों की संलिप्तता से भारत के वित्तीय क्षेत्र में झटके लगे. परिणामस्वरूप, सेबी ने कई स्क्रिप्स को निलंबित या डीलिस्ट किया, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने देशव्यापी मूल्यांकन शुरू किया, और नीति निर्माताओं ने टैक्स में मौजूद खामियों को बंद करना शुरू किया. जांच ने एनआरआई और विदेशी निवेशकों को भी उजागर किया जो अवैध धन को राउंड-ट्रिपिंग में शामिल थे, जिससे भारत के पूंजी बाजार की कमजोरियाँ सामने आईं.

प्रोजेक्ट फाल्कन: डेरिवेटिव्स फ्रॉड में ₹12,450 करोड़ की ऊँचाई पर उड़ान
जहां प्रोजेक्ट एलटीसीजी ने पेनी स्टॉक घोटालों को जमीन पर उतारा, वहीं प्रोजेक्ट फाल्कन ने उड़ान भरी बीएसई और यूनाइटेड स्टॉक एक्सचेंज (USE) के अलिक्विड ऑप्शंस सेगमेंट में हो रही हेराफेरी वाली ट्रेडिंग से निपटने के लिए. यह ₹12,450 करोड़ का घोटाला सिंक्रोनाइज़्ड ट्रेड्स के ज़रिए कृत्रिम मुनाफा और घाटा तैयार करने से जुड़ा था, जिससे वास्तविक बाज़ार जोखिम के बिना टैक्स बचाया गया.

फाल्कन-1: रिवर्सल ट्रेड्स (₹8,200 करोड़)
सिंडिकेट्स ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को उसी दिन या अगले दिन मनमाने प्रीमियम पर उलट कर ट्रेड किया, जिससे एक पक्ष को मुनाफा और दूसरे को घाटा हुआ, और कर योग्य आय को कम किया गया. डीपीएस ट्रैकर के टाइमस्टैम्प और क्वांटिटी के मिलान वाले विश्लेषण ने निष्पक्ष बाजार नियमों के उल्लंघन को उजागर किया.

फाल्कन-2: एक्सपायरी-आधारित घाटा (₹4,250 करोड़)
ऑप्शंस को एक्सपायरी के नजदीक खरीदा गया और उन्हें समाप्त होने दिया गया, जिससे अलिक्विड स्क्रिप्स में कृत्रिम घाटा हुआ, जिनमें वास्तविक ट्रेडिंग का कोई इरादा नहीं था. दलालों ने इन ट्रेड्स को ऐसे सेगमेंट्स में अंजाम दिया जहाँ खुले बाज़ार में शून्य वॉल्यूम था, लेकिन डीपीएस ट्रैकर की ट्रेड लॉग माइनिंग और ब्रोकर्स की प्रोफाइलिंग ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया.
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले (SEBI बनाम राखी ट्रेडिंग) के समर्थन से, डीपीएस और उनकी टीम ने CRU पोर्टल के माध्यम से अपनी जांच रिपोर्ट साझा की, जिससे 12 क्षेत्रीय टैक्स कार्यालयों द्वारा कार्रवाई शुरू हुई. CBDT ने ऐसे ट्रेड्स को असत्यापित और कर योग्य घोषित करने के दिशा-निर्देश जारी किए, जिससे भारत की टैक्स प्रणाली को मजबूती मिली.

वित्तीय न्याय के लिए एक वैश्विक मार्गदर्शिका
डीपीएस की जांचें, उनके रूपकात्मक डीपीएस ट्रैकर से संचालित, एल्गोरिदमिक ट्रेड फिल्टर्स, लेज़र फॉरेंसिक और SEBI एवं टैक्स कानूनों के बीच कानूनी समन्वय को जोड़ती हैं. यह दृष्टिकोण उन वैश्विक नियामकों के लिए एक दोहराया जा सकने वाला मॉडल प्रस्तुत करता है जो कम वॉल्यूम वाले डेरिवेटिव हेरफेर, पेनी स्टॉक घोटालों और सिंडिकेट्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टैक्स लूपहोल्स से जूझ रहे हैं. हालिया SEBI कार्रवाई, जिसमें ₹4,843 करोड़ मूल्य के इंडेक्स डेरिवेटिव्स में हेराफेरी करने वाली एक वैश्विक क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म को आरोपी बनाया गया, ऐसे उपायों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है.

डीपीएस की पहले की सफलता, जिसमें ₹40,000 करोड़ की टैक्स चोरी से जुड़ा अनअर्थिंग स्कैम सामने लाया गया था, ने 2016 की आय घोषणा योजना (Income Disclosure Scheme) की सफलता की नींव रखी. कोलकाता में आयकर जांच के उप निदेशक के रूप में, उन्होंने 80 शेल कंपनियों और 68,000 लाभार्थियों का पर्दाफाश किया, जिससे यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी की जांच बन गई. “कोलकाता शेल कंपनियों के लिए एक केंद्र था जो मनी लेयरिंग को सक्षम करता था. उस परंपरा को तोड़ना मेरा मिशन था,” डीपीएस ने कहा. अब, 2022 से लखनऊ में जांच के अतिरिक्त निदेशक के रूप में, वह अवैध संपत्ति की खोज में लगे हुए हैं, और भारत को वित्तीय पारदर्शिता के प्रकाशस्तंभ में बदल रहे हैं.

मिशन के पीछे का व्यक्ति
ध्रुव पुरारी सिंह, या डीपीएस, छह राज्यों में 15 वर्षों के अनुभव के साथ, वित्तीय अपराधों से निपटना उनके लिए नया नहीं है. न्याय के प्रति उनकी अडिग प्रतिबद्धता और डेटा एनालिटिक्स में महारत ने उन्हें व्यापक प्रशंसा दिलाई है. वैश्विक नियामकों से परामर्श के लिए उपलब्ध, डीपीएस का ट्रैकर वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है. जैसे-जैसे भारत के बाजार और जटिल हो रहे हैं, उनका मंत्र और भी सटीक प्रतीत होता है: “कोई भी डीपीएस ट्रैकर से नहीं बचता.” इस वित्तीय जीपीएस के ज़रिए अवैध संपत्ति को ट्रैक किया जा रहा है, और टैक्स चोरों व मनी लॉन्डरर्स के पास अब छिपने के स्थान खत्म हो रहे हैं.


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