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ऐसे कैसे होगा धारावी का उद्धार, प्रोजेक्ट के लिए अब तक एक इंच भी जमीन नहीं मिली?  

मुंबई की झुग्गी बस्ती धारावी के रीडेवलमेंट की योजना सवालों में घिर गई है. इसे लेकर पहले से ही राज्य में सियासी बवाल मचा हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती मुंबई की धारावी (Dharavi Slum) है. इसके उद्धार के लिए 'धारावी रीडेवलमेंट' प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसकी कमान गौतम अडानी के हाथों में है. पिछले साल उनकी कंपनी ने इसके लिए बोली जीती थी. इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 20,000 करोड़ रुपए में मध्य मुंबई में स्थित 259 हेक्टेयर में फैली धारावी झुग्गी बस्ती को नए सिरे से बसाया जाएगा . हालांकि, इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने में कंपनी को तमाम परेशानियां आ रही हैं. 

केवल इन्हें ही मुफ्त घर
प्रोजेक्ट के तहत, धारावी में वर्ष 2000 से पहले से रहने वाले लोगों को पुनर्विकास में मुफ्त घर मिलेंगे. जबकि, कम से कम 580 एकड़ जमीन अयोग्य माने जाने वाले लगभग 700,000 लोगों को आवास प्रदान करने के लिए चाहिए होगी. एक रिपोर्ट बताती है कि  580 एकड़ में से एक भी इंच जमीन अब तक नहीं मिल पाई है. रिपोर्ट में धारावी पुनर्विकास प्राधिकरण के प्रमुख एसवीआर श्रीनिवास के हवाले से बताया गया है कि अपात्र लोगों के लिए घर बनाने को लेकर अडानी समूह के जॉइंट वेंचर ने जमीन के लिए आवेदन किए हैं, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है. 

इसलिए नहीं मिली जमीन 
एसवीआर श्रीनिवास ने आगे कहा कि इसकी एक वजह ये है कि सरकारी एजेंसियों के पास जो जमीन है, उसे लेकर उनकी अपनी योजनाएं हैं. इसलिए कोई जमीन देने को तैयार नहीं है. श्रीनिवास के कहा कि मुंबई में जमीन पाना सबसे कठिन काम है और हमारे पास भौतिक रूप से एक इंच भी जमीन नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि यह प्रोजेक्ट कब पूरा होगा? बता दें कि अडानी समूह ने इस काम के लिए एक नई कंपनी भी बनाई है. उसने धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (DRPPL) के तहत अमेरिका की डिजाइनिंग कंपनी Sasaki और ब्रिटेन की कंसल्टेंसी फर्म Buro Happold के साथ-साथ आर्किटेक्ट हफीज कॉन्ट्रैक्टर के साथ हाथ मिलाया है. Sasaki और Buro Happold अर्बन प्लानिंग और इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रसिद्ध कंपनियां हैं. 

सिंगापुर की तर्ज पर विकास
DRPPL में अडानी ग्रुप की 80% और महाराष्ट्र सरकार की 20% हिस्सेदारी है. अडानी प्रॉपर्टीज ने इस प्रोजेक्ट के लिए 5,069 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी. कुछ समय पहले डीआरपीपीएल के प्रवक्ता ने कहा था कि धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट के लिए सिंगापुर प्रेरणा का काम करेगा. क्योंकि 1960 के दशक में सिंगापुर की स्थिति भी धारावी जैसी थी, लेकिन आज वह पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है. धारावी में 8.5 लाख से अधिक लोग रहते हैं. इस हिसाब से देखें, तो यहां प्रति वर्ग किमी में 354,167 लोग रहते हैं. यह दुनिया की छठी सबसे घनी बस्ती है. यहां 6,000 से अधिक छोटी और मझोली यूनिट्स कार्यरत हैं.

कैसे अमल में आएगी योजना?
धारावी में शिक्षा का स्तर और साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक है. अडानी समूह की कंपनी Adani Properties धारावी को पूरी तरह बदलने की योजना में जुट गई है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कंपनी को मध्य मुंबई में लाखों वर्ग फुट आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों को बेचकर हाई रिवेन्यु जुटाने में मदद मिलेगी. धारावी का पुनर्विकास अलग-अलग चरणों में किया जाएगा. Adani समूह पहले वर्तमान निवासियों को शिविरों में स्थानांतरित करेगा, ताकि उनके लिए नए घरों का पुनर्निर्माण किया जा सके. प्रोजेक्ट में बिक्री वाली इमारतें भी बनाई जाएंगी, जो प्रोजेक्ट लागत वसूलने में मदद करेंगी. इस इलाके के पुनर्वास के लिए परियोजना की कुल समयसीमा 7 साल है.

चालू है सियासी घमासान 
धारावी को फिर से विकसित करने के लिए योजना दो दशक पहले बनाई गई थी, लेकिन इसमें कई तरह की दिक्कतें आती रहीं. महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने अक्टूबर 2022 में नए टेंडर जारी करके इस काम को आगे बढ़ाया. इससे पहले, उद्धव ठाकरे सरकार ने साल 2019 में इस प्रोजेक्ट के लिए लगी बोली को रद्द कर दिया था. अभी भी इस प्रोजेक्ट पर सियासी घमासान मचा हुआ है. विपक्ष का कहना हैं कि अडानी ग्रुप को धारावी झुग्गी बस्ती के पुनरुद्धार का कॉन्ट्रैक्ट राज्य सरकार से अवैध लाभ के चलते मिला है. चंद रोज पहले शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि हम मुंबई को अडानी सिटी नहीं बनने देंगे. गौरतलब है कि धारावी को अंग्रेजों के समय बसाया गया था. यह एशिया की सबसे बड़ी बस्ती है. यहां कितने लोग रहते हैं इसका कोई सही आंकड़ा नहीं है. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, धारावी में 8.5 लाख लोग रहते हैं.
 


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