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RBI की सख्ती के बावजूद NDF बाजार में उछाल, 7.54 अरब डॉलर का रिकॉर्ड कारोबार

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक 30 मार्च को NDF मार्केट में क्लाइंट ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़कर 7.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया सख्ती के बाद नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजार में भारतीय कंपनियों की गतिविधि तेज हो गई है. 30 मार्च को इस बाजार में कारोबार 7 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक है. यह उछाल बताता है कि कंपनियों ने बदलते नियमों के बीच मुनाफे के नए मौके तलाश लिए हैं.

RBI के फैसलों से बदला बाजार का रुख

27 मार्च को RBI ने रुपये को मजबूती देने के लिए विदेशी मुद्रा (FX) पोजिशन से जुड़े नियमों में सख्ती की. खासतौर पर बैंकों की नेट ऑनशोर ओपन पोजिशन पर सीमा तय की गई. इस कदम के बाद बैंकों ने अपनी पोजिशन घटानी शुरू कर दी. इससे ऑनशोर और NDF बाजार के बीच अंतर बढ़ा. जिसने आर्बिट्राज के मौके पैदा किए. कंपनियों ने इसी अंतर का फायदा उठाते हुए रणनीतिक ट्रेडिंग शुरू कर दी.

NDF बाजार में रिकॉर्ड कारोबार

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक 30 मार्च को NDF मार्केट में क्लाइंट ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़कर 7.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस दौरान डॉलर की बिक्री हावी रही. कंपनियों ने करीब 7.51 अरब डॉलर के डॉलर बेचे. जबकि खरीदारी बेहद सीमित रही. यह दर्शाता है कि कंपनियां मुनाफे के अवसरों को भुनाने में सक्रिय रहीं.

रुपये पर दबाव और फिर स्थिरता

शुरुआती दौर में इन गतिविधियों के चलते रुपये पर दबाव देखने को मिला. डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया गिरकर 95 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया. जो अब तक का निचला स्तर रहा. हालांकि बाद में RBI के अतिरिक्त कदमों और बाजार संतुलन के चलते रुपया संभला. और अब करीब 93 प्रति डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है.

RBI ने और कड़े किए नियम

1. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए RBI ने आगे और सख्ती दिखाई.
2. बैंकों को ग्राहकों को NDF ऑफर करने से रोका गया.
3. कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं दी गई.

इन कदमों का असर यह हुआ कि बाजार में अस्थिरता कम हुई. और रुपये को कुछ मजबूती मिली.

क्या संकेत देता है यह ट्रेंड

NDF बाजार में तेज उछाल इस बात का संकेत है कि कंपनियां नीतिगत बदलावों के अनुसार तेजी से खुद को ढाल रही हैं. साथ ही यह भी स्पष्ट है कि विदेशी मुद्रा बाजार में छोटे अंतर भी बड़े मुनाफे के अवसर पैदा कर सकते हैं. आने वाले समय में RBI की नीतियां और वैश्विक परिस्थितियां तय करेंगी कि रुपये की चाल और NDF बाजार की गतिविधियां किस दिशा में जाती हैं.


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