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चालू खाते में फिर घाटा लौटने की आशंका: पहली तिमाही में 13 अरब डॉलर का घाटा संभव - ICRA
Q4FY25 में 13.5 अरब डॉलर का अप्रत्याशित अधिशेष, लेकिन Q1FY26 में व्यापार घाटा और सेवाओं से कम कमाई बनेगी चुनौती
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश की चालू खाते की स्थिति एक बार फिर घाटे की ओर मुड़ सकती है. रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1FY26) में भारत का चालू खाता करीब 13 अरब डॉलर यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.3 प्रतिशत घाटे में जा सकता है। इसकी प्रमुख वजह व्यापार घाटे के बढ़ने और सेवाओं से होने वाले अधिशेष में कमी को माना जा रहा है.
हालांकि, वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही (Q4FY25) में चालू खाते में 13.5 अरब डॉलर का अधिशेष रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 4.6 अरब डॉलर के मुकाबले तीन गुना अधिक है. यह ICRA के पूर्वानुमान (GDP का 0.2%) से भी काफी ऊपर रहा. इस मजबूत प्रदर्शन की वजह प्राथमिक आय के बहाव में अप्रत्याशित गिरावट और सेवाओं से मजबूत कमाई रही.
ICRA की रिपोर्ट में बताया गया कि Q4FY25 में अदृश्य आय (invisibles) से हुई कमाई 28.9% बढ़कर 73 अरब डॉलर हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 56.6 अरब डॉलर थी. इसने 59.5 अरब डॉलर के व्यापार घाटे (Q4FY24 में 52 अरब डॉलर) की भरपाई कर दी और चालू खाते को अधिशेष में बनाए रखा.
Q3FY25 में जहां चालू खाते में 11.3 अरब डॉलर का घाटा रहा था, वहीं Q4 में सभी कारकों - कम व्यापार घाटा, कम प्राथमिक आय बहाव और उच्च सेवाओं से आय - ने इसे अधिशेष में बदल दिया.
ICRA का अनुमान है कि पूरे FY2026 के लिए चालू खाता घाटा GDP का लगभग 1% रहेगा, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहे. एजेंसी ने कहा कि यह घाटा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद "पूरी तरह प्रबंधनीय" रहेगा.
Q1FY26 में जहां व्यापार घाटे के बढ़ने और सेवाओं के क्षेत्र से आय में संभावित गिरावट की आशंका है, वहीं यह देखना अहम होगा कि भारत के विदेशी निवेश, रेमिटेंस और अन्य माध्यमों से होने वाली आय चालू खाते को कितना संतुलित कर पाएगी।
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