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Petrol-Diesel: कच्चे तेल में फिर दिखी नरमी, क्या अब दरियादिली दिखाएंगी हमारी कंपनियां?

पिछले काफी समय से देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जबकि इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें जरूर नीचे आई हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

जिस कच्चे तेल (Cude Oil) के नाम पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि की थी, उसके दाम अब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं. लिहाजा, सबसे बड़ा सवाल अब ये है कि क्या पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की आसमान पर पहुंच चुकीं कीमतों में कुछ कमी आएगी? देश में पेट्रोल-डीजल के दाम पिछले 570 दिनों से स्थिर हैं, यानी उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. आम जनता को चुनावी मौसम में उम्मीद थी कि मोदी सरकार तेल पर राहत दिलाने के लिए कुछ करेगी, क्योंकि चुनाव में ही सरकारों को जनता का दर्द दिखाई देता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब एक बार फिर से सबकी नजरें सरकार और तेल कंपनियों पर टिक गई हैं. 

इस वजह से आई गिरावट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड वायदा 74.30 डॉलर प्रति बैरल पर और यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा 69.59 डॉलर प्रति बैरल पर मिल रहा है. हाल ही में खबर आई थी कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दैनिक आधार पर संशोधन तब शुरू करेंगी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से नीचे स्थिर हो जाएंगी. अब जब कच्चा तेल 80 डॉलर के नीचे आ गया है, तो यह देखने वाली बात होगी कि क्या सरकारी तेल कंपनियां इसका फायदा आम जनता को देती हैं? रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. इसकी वजह अमेरिकी गैसोलीन इन्वेंट्री में उम्मीद से कहीं अधिक वृद्धि है.   

जमकर कमा रहीं मुनाफा 
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने पिछले कई महीनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. संयुक्त रूप से 90 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इन कंपनियों ने कच्चे तेल के दामों में लगी आग का हवाला देकर कई बार घरेलू स्तर पर कीमतें बढ़ाई थीं, लेकिन क्रूड ऑयल में नरमी का फायदा जनता को नहीं दिया. कंपनियां कहती रही हैं कि वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उन्हें भारी नुकसान हुआ था. हालांकि, गौर करने वाली बात ये भी है कि इससे पहले कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण उन्होंने जमकर मुनाफा भी कमाया था. हालिया आईं खबरों के मुताबिक, तेल कंपनियां घाटे से बाहर आ चुकी हैं और मुनाफा कमा रही हैं. यानी उनके पास दाम कम करने की पूरी गुंजाइश है, इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं किया जा रहा है और न ही मोदी सरकार इस बारे में कोई कदम उठा रही है.


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