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क्या सट्टा बाजार और शेयर मार्केट चुनाव के रुझान को प्रभावित कर रहे हैं? रिपोर्ट में जानिए

2019 के चुनावों की तुलना में 2024 के लिए मतदान प्रतिशत कम था, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह वास्तव में स्वतंत्रता के बाद से भारत के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पलक शाह

पिछले दो हफ्तों से सट्टा बाज़ार के रुझान शेयर बाज़ार की चाल को काफ़ी हद तक प्रभावित कर रहे हैं. सट्टा बाज़ार के अनुसार, मार्च में मतदान के पहले चरण से पहले, भाजपा अकेले 338 सीटें जीत रही थी. लेकिन जैसे-जैसे मतदान का 5वां चरण नज़दीक आ रहा है, सट्टा बाज़ार ने भाजपा की सीटों की संख्या घटाकर 290 कर दी है, जो दर्शाता है कि मोदी लहर जिसने भाजपा को सत्ता में पहुंचाया था, वह कमज़ोर पड़ रही है. 290 के साथ भाजपा अभी भी बहुमत के आकड़े से ऊपर है, लेकिन शेयर बाज़ार के निवेशकों ने कई तरह के परिदृश्यों की कल्पना करना शुरू कर दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी चली जाना और भारतीय रुपये में तेज़ गिरावट शामिल है अगर भाजपा की सीटों की संख्या 272 के निशान से थोड़ी भी कम रह गई.  

सट्टेबाजों का भाजपा को कम सीटें मिलने का यह अनुमान इस तथ्य पर आधारित है कि 2019 की तुलना में 2024 में मतदान प्रतिशत कम रहा. इस तरह के अनुमानों के कारण बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में 3 मई को अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 22794 से लगभग 1000 अंकों की गिरावट आई है. केवल 10 दिनों में, निफ्टी इंडेक्स ने 13 मई को 21,821 का निचला स्तर छुआ. इंडेक्स को छोड़कर, PSU कंपनियों के कई शेयरों में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है. साथ ही, पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले समूह अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर की कीमत पिछले कुछ दिनों में 10 प्रतिशत से अधिक गिर गई है. लेकिन क्या शेयर बाजार और सट्टेबाज रुझानों को गलत तरीके से समझ रहे हैं? शेयर बाजार और सट्टा बाजार में आखिर ऐसी निराशा की क्या वजह है?

आंकड़ों का खेल 

पिछले दो चुनावों और हाल ही में संपन्न हुए 2023 के राज्य चुनावों को देखते हुए, जहां भाजपा ने चार में से तीन विधानसभा चुनाव जीते, इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में जनता राहुल गांधी और क्षेत्रीय दलों की तुलना में पीएम मोदी से अधिक प्रभावित है, जिन्हें पिछले 10 वर्षों में चुनावों के बाद अधिकांश जनता ने नकार दिया है. तो फिर इस बार बाजारों में डर और घबराहट क्यों पैदा हो रही है?

राष्ट्रीय चुनावों के पहले चार चरणों में कम मतदान ही एकमात्र कारण है, जिसके आधार पर सट्टेबाज भावनाओं को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि पीएम मोदी और भाजपा को हिंदू कमोडिटी मतदाताओं से कम वोट शेयर मिलेगा, जिनके बारे में माना जाता है कि वे 2019 की तुलना में अधिक संख्या में मतदान नहीं करेंगे. जबकि कांग्रेस और अन्य दलों के लिए अनुमान यह है कि वे इस बार वोट शेयर में बढ़ोतरी करेंगे, क्योंकि उनका मतदाता आधार, जिसे बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय माना जाता है, कभी भी मतदान नहीं छोड़ता है और बड़ी संख्या में मतदान करता है.

ऊपर बताए गए अनुमान की तरह अकेले ही बड़े शेयर बाजार निवेशकों और सट्टेबाजों में चिंता पैदा हो रही है, जो अपनी पोजीशन कम कर रहे हैं, जिससे निफ्टी इंडेक्स और शेयरों में गिरावट आ रही है. विदेशी निवेशक और भारत के  HNI दोनों ही भाजपा को कम सीटें मिलने की स्थिति में निफ्टी में गिरावट और रुपये के गिरने का परिणाम हैं. ऐसा अनुमान है कि अगर भाजपा 300 सीटें जीतती है तो मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने रहेंगे और बाजार में तेजी आएगी, लेकिन अगर पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह जाती है और उसे सहयोगियों से समर्थन लेना पड़ता है, तो प्रधानमंत्री मोदी को किनारे कर दिया जाएगा और बाजार व रुपये में तेज गिरावट आएगी.

डर फैलाने और जोड़-तोड़ करने वाले क्या छिपा रहे हैं? 

फाइनेंशियल मार्केट एक्सपर्ट और पूर्व फंड मैनेजर अजय बग्गा कहते हैं कि पहले चार चरणों में अब तक के रुझान को देखते हुए, 2019 में 60 करोड़ मतदाताओं की तुलना में 2024 में 63 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे. संख्या वास्तव में अधिक हो सकती है क्योंकि मतदान के अंतिम तीन चरण उन राज्यों में हैं जो भाजपा का गढ़ हैं. 2019 में मात्र 37 प्रतिशत वोट शेयर से भाजपा को 303 सीटें मिलीं. मतदाताओं की संख्या बढ़ने की संभावना के साथ, भाजपा का वोट शेयर भी बढ़ जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप अधिक सीटें मिलेंगी.

प्रतिशत के लिहाज से इस बार मतदान प्रतिशत 2019 के मुकाबले कम दिख रहा है क्योंकि मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. 2019 में 91 करोड़ मतदाता थे लेकिन तुलनात्मक रूप से 2024 में 98 करोड़ मतदाता हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से प्रतिशत के लिहाज से इस बार मतदान प्रतिशत 2019 के मुकाबले कम दिख रहा है. 2019 में 67 प्रतिशत मतदाता वोट डालने निकले थे जो घटकर 63 प्रतिशत या 64 प्रतिशत रह जाने की संभावना है. लेकिन कुल संख्या के लिहाज से 2019 के मुकाबले वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या में कम से कम 5-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसलिए, यह मानकर चलें कि कम मतदान से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को नुकसान होगा, यदि अधिक संख्या में मतदाता वोटिंग के लिए निकलेंगे तो इससे सत्तारूढ़ पार्टी और प्रधानमंत्री को भारी जीत मिलेगी.

अजय बग्गा ने इसके साथ ही कहा कि 98 करोड़ मतदाताओं और 63 करोड़ वोटों की संभावित संख्या के इस विशाल पैमाने पर, कोई भी सर्वेक्षण सटीक होने का दावा नहीं कर सकता. इसमें सोशल मीडिया का प्रभाव भी शामिल है, जिसे बॉट्स और टूल किट के साथ हेरफेर किया जाता है. इससे मूड और नब्ज को सही ढंग से समझना बहुत मुश्किल हो जाता है, खासकर तब जब कोई व्यापक लहर न हो. बहुत सारे शोध बताते हैं कि मतदान परिणाम का सटीक पूर्वानुमान नहीं है. उस परिप्रेक्ष्य में, मतदान प्रतिशत के आधार पर भारी जीत के दावे भम्र पैदा कर रहे हैं.

कैसे काम करता है हेरफेर?

सूत्रों का कहना है कि सट्टा बाजार में, सट्टेबाजों को भाजपा की सीटों की संख्या को कम करके जो भी नुकसान हो रहा था, वे शेयर बाजारों में शॉर्ट करके उसे कवर कर रहे थे. यह विपक्षी दलों के करीबी बड़े सट्टेबाजों के लिए एक बेहतरीन बचाव है, क्योंकि उन्होंने भावनाओं को खराब करके शेयर बाजारों में जीत हासिल की है, जिसके कारण निफ्टी इंडेक्स और कई अन्य शेयरों में लगभग 1000 अंकों की गिरावट आई है, जबकि वैश्विक बाजार स्थिर हैं जो लंबे समय तक टूट रहे थे. पांचवें चरण के मतदान के बाद, जब 20 मई को 538 में से लगभग 450 सीटों के लिए मतदान होगा, तो सट्टा बाजार का रुझान उलट सकता है क्योंकि जिन लोगों ने भाजपा को शॉर्ट किया था, वे प्रतिशत के हिसाब से नहीं बल्कि मतदान की संख्या को देखते हुए कवर करने के लिए वापस आएंगे.

बाजार की स्थिति

स्ट्राइक मनी एनालिटिक्स और इंडियाचार्ट्स के संस्थापक रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की स्थिति में बाजार में अत्यधिक बिकवाली हो रही है. लेकिन बाजार 21,800 के निकट एक डबल बॉटम बना सकता है, जो आगे एक तेजी का संकेत दे रहा है और चुनावों से पहले निफ्टी के 22800 के उच्च स्तर दोबारा छूने की संभावना है. 
 
NSE द्वारा इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए लॉट साइज के हालिया संशोधन के आंकड़ों के अनुसार, 13 मई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजारों में इंडेक्स डेरिवेटिव सेगमेंट में 158874 कॉन्ट्रैक्ट्स के बराबर नेट इंडेक्स शॉर्ट पोजीशन होल्ड कर रहे हैं. घरेलू ट्रेडर्स जो मुख्य रूप से हाई नेट वर्थ वाले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कोविड के बाद से बाजारों में बाजार की चाल को सही तरीके से समझा है वो 230074 कॉन्ट्रैक्ट्स के बराबर नेट लॉन्ग पोजीशन होल्ड कर रहे हैं. अप्रैल 2020 में कोविड के दौरान, घरेलू ट्रेडर्स इंडेक्स में 288132 के बराबर नेट लॉन्ग पोजीशन होल्ड कर रहे थे. हाल ही में, जब निफ्टी इंडेक्स अक्टूबर 2023 में निचले स्तर पर पहुंचा और वहां से तेजी से बढ़ा, तब भी घरेलू सट्टेबाज 292822 कॉन्ट्रैक्ट्स के बराबर नेट लॉन्ग पोजीशन होल्ड कर रहे थे जिससे यह पता चलता है कि हवा किस तरफ बह रही है.

एफपीआई का हाल

सूत्रों का कहना है कि प्रमुख एफपीआई और विदेशी बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए कुछ परिदृश्य तैयार किए हैं, जिसके अनुसार अगर भाजपा 272 के बहुमत के आंकड़े से पीछे रह जाती है तो बाजार में और रुपये में गिरावट आ सकती है. उस स्थिति में, मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं रह सकते हैं और कई अन्य लोग अपना दावा पेश करने के लिए आगे आ सकते हैं. अगर भाजपा कम से कम 290 सीटें जीतती है, जैसा कि सट्टा बाजार भविष्यवाणी कर रहा है, तो बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आएगी, लेकिन विपक्ष के मजबूत होने के कारण तेजी की संभावना नहीं है. भाजपा के लिए 300 से अधिक सीटें बजट सत्र तक बाजार में तेजी का कारण बनेंगी, जो चुनाव के बाद कुछ महीनों से भी कम समय में पेश होगा.
 


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