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जीएसटी दर कटौती पर संदेह, उपभोक्ता मांग रहे एंटी-प्रॉफिटियरिंग व्यवस्था की वापसी
लोकलसर्कल्स सर्वे में 87% लोगों ने कहा– सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनियां जीएसटी राहत का फायदा कीमतों में कमी के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि जीएसटी दरों में कटौती का फायदा कंपनियां कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं. लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के अनुसार, 87 प्रतिशत लोगों ने सरकार से एंटी-प्रॉफिटियरिंग व्यवस्था को फिर से सक्रिय करने की मांग की है ताकि दर कटौती का लाभ सुनिश्चित रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचे.
सर्वे में देशभर के 314 जिलों से 39 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की राय शामिल हुई. इसमें करीब तीन-चौथाई उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें संदेह है कि कंपनियां अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) घटाकर राहत देंगी. केवल 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने भरोसा जताया कि दर कटौती का लाभ मिलेगा. 42 प्रतिशत ने कहा कि वे आंशिक रूप से आश्वस्त हैं जबकि 33 प्रतिशत ने बिल्कुल भरोसा नहीं जताया.
जीएसटी प्रणाली में 22 सितंबर से लागू होने वाले बदलावों (जीएसटी 2.0) के तहत कई वस्तुएं और सेवाएं अब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत स्लैब में लाई जाएंगी. केवल तथाकथित "सिन" या "डी-मेरिट" वस्तुओं पर 40 प्रतिशत दर लागू रहेगी. कई सामानों को 18 या 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और कुछ को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत स्लैब में डाला गया है.
एंटी-प्रॉफिटियरिंग तंत्र नवंबर 2017 में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 171 के तहत बनाया गया था ताकि दर कटौती और इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे. हालांकि दिसंबर 2022 में इसे भंग कर इसकी जिम्मेदारी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को सौंप दी गई. रिपोर्टों के मुताबिक, सीसीआई को एंटी-प्रॉफिटियरिंग शिकायतों से निपटने में विशेषज्ञता और तालमेल की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
अक्टूबर 2024 से नई शिकायतें जीएसटी अपीलीय अधिकरण (GSTAT) को भेजी जा रही हैं. लेकिन पुराने मामलों में बैकलॉग बना हुआ है और अप्रैल 2025 तक पुराने ढांचे में नई शिकायतें लेना बंद हो गया. इससे प्रवर्तन की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.
लोकलसर्कल्स का कहना है कि उपभोक्ताओं का अविश्वास पिछले अनुभवों से जुड़ा है. दरअसल, पहले दौर की दर कटौतियों के बावजूद कई कंपनियों ने इनपुट लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें कम नहीं कीं बल्कि कहीं-कहीं उन्हें बढ़ा भी दिया.
सर्वे में सामने आया है कि यह चिंता देशभर में समान रूप से मौजूद है, चाहे उपभोक्ता टियर-1 शहरों से हों या छोटे टियर-3 और टियर-4 जिलों से.
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी 2.0 के तहत यदि सरकार उपभोक्ताओं के हित में दो साल के लिए एक विशेष एंटी-प्रॉफिटियरिंग प्राधिकरण सक्रिय करती है तो शिकायतों का समाधान तेज होगा और अनुपालन भी बेहतर होगा. सरकार का फैसला यह तय करेगा कि जीएसटी 2.0 उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देगा या केवल दरों के फेरबदल तक ही सीमित रहेगा.
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