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कच्चे तेल की आग से बढ़ी चिंता, क्रिसिल ने महंगाई अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत किया

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि सरकार की नीतिगत कार्रवाई और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव इस दिशा को काफी हद तक तय करेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई दर का अनुमान बढ़ा दिया है. एजेंसी के अनुसार अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत रहने की संभावना है. यह संशोधन लंबे समय से जारी पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण किया गया है.

ऊर्जा कीमतों का दबाव बना मुख्य कारण

क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा, व्यापार और परिवहन लागत बढ़ने से दूसरी दौर की महंगाई (कोर महंगाई) पर दबाव बन सकता है. हालांकि सरकार अभी कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का अधिकांश बोझ वहन कर रही है, लेकिन अगर वैश्विक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है तो रसोई गैस और परिवहन ईंधन की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं.

खाद्य महंगाई पर मौसम का जोखिम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भीषण गर्मी और कमजोर मानसून की संभावना खाद्य महंगाई के लिए बड़ा जोखिम है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पहले दीर्घकालिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रह सकता है और यह लगभग 92 प्रतिशत औसत रहने की संभावना है. साथ ही, अल नीनो परिस्थितियों के बनने की भी संभावना जताई गई है, जो मानसून को कमजोर कर सकती हैं.

मार्च में बढ़ी खुदरा महंगाई

सरकारी आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 3.2 प्रतिशत थी. इस वृद्धि का कारण खाद्य और ईंधन दोनों श्रेणियों में बढ़ोतरी रही.

1. एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में मार्च की शुरुआत में 60 रुपये की बढ़ोतरी
2. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल
3. जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को सरकार ने लगभग स्थिर रखा

सरकार ने दिया कीमतों का सहारा

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने कर में कटौती करके उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है. मार्च के अंत में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया गया, जिससे ईंधन कीमतों पर दबाव कुछ हद तक कम हुआ.

कोर महंगाई अभी नियंत्रण में

क्रिसिल के अनुसार फिलहाल कोर महंगाई पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है क्योंकि ऊर्जा कीमतों से जुड़ा दूसरा दौर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है. इसके अलावा सोने और चांदी की कीमतों में कमी और उच्च आधार प्रभाव ने भी महंगाई को कुछ हद तक संतुलित रखा है.

 


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