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कोयला कारोबार होगा डिजिटल, MCX को मिला नया प्लेटफॉर्म शुरू करने का ग्रीन सिग्नल
MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे 17 अप्रैल 2026 को SEBI से कोल एक्सचेंज स्थापित करने के लिए मंजूरी मिल गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 hours ago
देश में कोयला कारोबार अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिलने के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) जल्द ही कोयला ट्रेडिंग के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी में है. इस कदम से कोयले की खरीद-बिक्री ज्यादा पारदर्शी, संगठित और टेक्नोलॉजी आधारित हो सकेगी.
MCX को मिली SEBI की मंजूरी
MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे 17 अप्रैल 2026 को SEBI से कोल एक्सचेंज स्थापित करने के लिए मंजूरी मिल गई है. अब अगला कदम कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया से लाइसेंस हासिल करना होगा, जिसके लिए कंपनी निर्धारित नियमों के बाद आवेदन करेगी.
क्या है MCX का प्लान
इस मंजूरी के बाद MCX एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बनाएगा, जिसका संभावित नाम MCX Coal Exchange Ltd. हो सकता है. इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कोयले की खरीद-बिक्री के लिए एक रेगुलेटेड और डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है.
कंपनी इस नई इकाई में शुरुआती तौर पर करीब 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगी, ताकि जरूरी नेटवर्थ की शर्तों को पूरा किया जा सके. शुरुआत में MCX की इस कंपनी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, हालांकि भविष्य में इसमें रणनीतिक निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है.
कोयला ट्रेडिंग में क्या बदलेगा
नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कोयले की ट्रेडिंग पहले से ज्यादा पारदर्शी और आसान हो जाएगी. यहां पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और फिजिकल डिलीवरी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. इससे कीमत तय होने की प्रक्रिया यानी प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी और पूरे सेक्टर में एफिशिएंसी बढ़ेगी. MCX अपने मौजूदा अनुभव जैसे गवर्नेंस, सर्विलांस और क्लियरिंग सिस्टम का उपयोग कर एक मजबूत कोल ट्रेडिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बना रहा है.
NSE भी रेस में शामिल
इस क्षेत्र में सिर्फ MCX ही नहीं, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है. NSE को भी अपने कोल एक्सचेंज प्रोजेक्ट के लिए SEBI से मंजूरी मिल चुकी है. NSE अपनी नई कंपनी National Coal Exchange of India Limited में करीब 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगा. इसमें उसकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि बाकी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य निवेशकों को दी जाएगी.
पूरे सेक्टर पर पड़ेगा असर
MCX और NSE जैसे बड़े एक्सचेंजों के इस क्षेत्र में उतरने से कोयला उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. एक ही प्लेटफॉर्म पर खरीदार और विक्रेता आने से बाजार की कीमतें ज्यादा पारदर्शी होंगी. साथ ही कोयले को ग्रेड, क्वालिटी और डिलीवरी के आधार पर स्टैंडर्डाइज किया जाएगा, जिससे ट्रेडिंग प्रक्रिया और व्यवस्थित बनेगी.
इसके अलावा, डिजिटल सिस्टम के चलते मैनुअल और ऑफलाइन डीलिंग में कमी आएगी. पावर, सीमेंट और स्टील कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार आसानी से कोयला खरीद सकेंगी और बेहतर प्लानिंग कर पाएंगी.
शुरुआत में यह प्लेटफॉर्म फिजिकल ट्रेडिंग पर फोकस करेगा, लेकिन आगे चलकर इसके आधार पर फ्यूचर्स और हेजिंग जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए जा सकते हैं.
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