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Cheviot जिस Share Buyback का करने वाली है ऐलान, उससे कितना वाकिफ हैं आप?
Cheviot Company के शेयर कल उछाल के साथ बंद हुए थे. बीते 5 सत्रों में कंपनी का शेयर 17.55% चढ़ा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
जूट के सामान की मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री से जुड़ी दिग्गज कंपनी Cheviot फिर से शेयर बायबैक का ऐलान करने वाली है. 24 मई को कंपनी की बोर्ड मीटिंग होनी है, जिसमें इक्विटी शेयरों के बायबैक पर विचार किया जाएगा. 2017 के बाद यह चौथा मौका होगा जब कंपनी शेयर बायबैक का फैसला लेगी. एक रिपोर्ट बताती है कि Cheviot ने 10 जनवरी से 21 जनवरी, 2022 के बीच 43.1 करोड़ रुपए का शेयर बायबैक किया था. जबकि 2020 में उसने टेंडर ऑफर रूट के माध्यम से 18 करोड़ के शेयर वापस खरीदे थे.
देती रही है डिविडेंड
Cheviot उन कंपनियों में शुमार है, जो अपने निवेशकों को डिविडेंड का तोहफा देती रहती हैं. अगस्त 2022 में Cheviot ने 60 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था. इसके बाद उसने अगस्त 2023 में 27 रुपए प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया था. कंपनी 2021 में भी ऐसा कर चुकी है. जबकि अगस्त 2018 में उसने हर 2 शेयरों पर एक बोनस शेयर भी दिया था. Cheviot Company Ltd के शेयर की बात करें, तो मंगलवार को यह करीब 12 प्रतिशत की छलांग के साथ 1,480 रुपए पर बंद हुआ था. बता दें कि कंपनी का मार्केट कैप 886.62 करोड़ रुपए है.
क्या होता है शेयर बायबैक?
अब जानते हैं कि आखिर शेयर बायबैक होता क्या है? आमतौर पर शेयर बाजार में हमें जब कोई कंपनी पसंद आती है तो हम उसके शेयर खरीद लेते हैं, तो उसे SHARE BUY करना कहते हैं. लेकिन जब यही प्रक्रिया रिवर्स हो जाए, यानी जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदना शुरू कर दे तो इसे SHARE BUYBACK कहते हैं. बायबैक दो प्रकार के होते हैं. टेंडर ऑफर बायबैक और ओपन ऑफर बायबैक. टेंडर ऑफर बायबैक के तहत कंपनी जब ये तय करती है कि वो शेयरों का बायबैक करेगी, तो एक रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया जाता है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में कंपनी के शेयर मौजूद रहते हैं वो ही निवेशक कंपनी के टेंडर ऑफर बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं. कंपनियां आमतौर पर निवेशकों को बायबैक का ऑफर मार्केट प्राइज से ज्यादा पर करती हैं, ताकि निवेशक अपना फायदा देखकर इस ऑफर में हिस्सा लें. कंपनियों की ओर से टेंडर ऑफर बायबैक के लिए 10 दिनों का समय दिया जाता है. इस दौरान शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को ऑफर करने होते हैं. 10 दिनों के बाद शेयरहोल्डर्स के पास ई-मेल के जरिए ये जानकारी मिलती है कि उनके कितने शेयर बायबैक हुए हैं. क्योंकि कंपनियां अक्सर पूरे शेयरों का बायबैक नहीं करती है.
कैसे होता है इससे फायदा?
इसी तरह, जब कंपनी अपने शेयरों को एक्सचेंज से खरीदती है तो उसे ओपन ऑफर बायबैक कहते हैं, जैसा कि एक आम निवेशक करता है. हालांकि कंपनी पहले से ये तय कर लेती है कि उसे कितने शेयर खरीदने हैं और किस भाव पर खरीदने हैं. कंपनी ये शेयर बायबैक की प्रक्रिया 6 महीने के दौरान पूरा करती है. इस ऑफर में आम शेयरहोल्डर्स का कोई लेना देना नहीं होता है, क्योंकि कंपनी ओपन मार्केट से शेयर खरीद रही है, ठीक वैसे ही जैसे हम और आप खरीदते हैं. अब बात करते हैं इससे निवेशकों को होने वाले फायदे की. जब कोई कंपनी शेयर बायबैक लेकर आती है, तो अक्सर उसका मकसद अपने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने का होता है. ऐसे में जो निवेशक इस शेयर बायबैक ऑफर में हिस्सा नहीं लेते हैं, उन्हें भी फायदा मिलता है, क्योंकि आमतौर पर शेयरों का प्राइज आगे चलकर बढ़ जाता है. दूसरी तरफ जो निवेशक शेयर बायबैक में हिस्सा लेते हैं उन्हें शेयर की बढ़ी हुई कीमत उसी समय मिल जाती है यानी वो भी फायदे में रहते हैं.
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