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पहली तिमाही में 22 राज्यों की कैपेक्स रफ्तार सुस्त, यूपी-बंगाल समेत कई बड़े राज्य पिछड़े: CAG
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 22 राज्यों ने संयुक्त रूप से पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित 10.45 लाख करोड़ रुपये के बजट में से 1.11 लाख करोड़ रुपये खर्च किए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में राज्यों के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) की रफ्तार सुस्त रही है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के मासिक खातों के विश्लेषण के अनुसार, 22 राज्यों ने अप्रैल-जून अवधि में अपने पूंजीगत व्यय बजट का औसतन केवल 10.67 प्रतिशत खर्च किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 10.94 प्रतिशत से कम है. रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों का प्रदर्शन भी अपेक्षा से कमजोर रहा, जबकि केरल ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया.
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 22 राज्यों ने संयुक्त रूप से पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित 10.45 लाख करोड़ रुपये के बजट में से 1.11 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. हालांकि, यह पिछले छह वर्षों की पहली तिमाहियों में खर्च की गई सबसे बड़ी वास्तविक राशि है, लेकिन बजट आवंटन के मुकाबले खर्च का अनुपात घटा है.
पिछले वर्षों की तुलना में कैसी रही तस्वीर?
सीएजी के आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में कैपेक्स खर्च का अनुपात पिछले कुछ वर्षों से सीमित दायरे में बना हुआ है. वित्त वर्ष 2023 में यह सबसे कम 9.02 प्रतिशत रहा था, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 13.23 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंचा था. मौजूदा वित्त वर्ष में 10.67 प्रतिशत का खर्च वित्त वर्ष 2023 और 2025 से बेहतर जरूर है, लेकिन वित्त वर्ष 2022 और 2026 की पहली तिमाही से कम है.
केरल ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार
राज्यों में केरल ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने वार्षिक पूंजीगत व्यय बजट का 36.41 प्रतिशत पहली तिमाही में ही खर्च कर दिया. इसके बाद मध्य प्रदेश (18.21 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (16.61 प्रतिशत), हरियाणा (16.26 प्रतिशत) और हिमाचल प्रदेश (15.90 प्रतिशत) का स्थान रहा.
त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश पीछे
सबसे कमजोर प्रदर्शन त्रिपुरा का रहा, जिसने अपने पूंजीगत व्यय आवंटन का केवल 1.81 प्रतिशत खर्च किया. इसके बाद पश्चिम बंगाल (1.89 प्रतिशत) और मेघालय (3.03 प्रतिशत) रहे. बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश, जिसका कैपेक्स बजट 1.78 लाख करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ा है, उसने जून के अंत तक केवल 6.34 प्रतिशत राशि खर्च की. वहीं ओडिशा (5.19 प्रतिशत), तमिलनाडु (5.53 प्रतिशत) और कर्नाटक (6.83 प्रतिशत) भी पूंजीगत व्यय के मामले में धीमे रहे.
राजस्व व्यय और कर संग्रह की स्थिति
पहली तिमाही में 22 राज्यों ने कुल 9.66 लाख करोड़ रुपये का राजस्व व्यय किया, जो उनके संयुक्त वार्षिक राजस्व व्यय बजट का 18.52 प्रतिशत है. इस मामले में हिमाचल प्रदेश (25.01 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (24.66 प्रतिशत), तेलंगाना (23.38 प्रतिशत) और केरल (22.69 प्रतिशत) सबसे आगे रहे. वहीं झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा.
कर राजस्व के मोर्चे पर राज्यों ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.73 लाख करोड़ रुपये की वसूली की, जो पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानित कर राजस्व 40.48 लाख करोड़ रुपये का 19.11 प्रतिशत है.
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