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इक्विटी डायरेक्टिव सेगमेंट में BSE ला रहा LPC मैकेनिज्म, इस दिन होगा मॉक ट्रेडिंग सेशन

BSE द्वारा लागू किए जा रहे LPC मैकेनिज्म का उद्देश्य बाजार में असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों से रक्षा करना और अनियमित ट्रेडर्स को रोकना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने अपने फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट 'इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट' (Equity Derivative Segment) में लिमिट प्राइस प्रोटेक्शन (LPC) मेकैनिज्म लागू करने का फैसला लिया है. बीएसई इसे 16 अप्रैल 2024 से लागू करने जा रहा है. यह कदम प्री ट्रेड रिस्क कंट्रोल उपाय में और अधिक मजबूती लाने के लिए है. बीएसई ने एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में फ्री ट्रेड रिस्क कंट्रोल उपायों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक्सचेंज मंगलवार यानी 16 अप्रैल 2024 से एलपीसी मेकैनिज्म लागू करेगा और मौजूदा प्राइस रीजनबिलिटी चेक इस तारीख से ऑपरेशनल नहीं रहेगा.

क्या काम करेगा एलपीसी?

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसारबीएसई द्वारा लागू किया जा रहा ये नया एलपीसी मैकेनिज्म डेरिवेटिव बाजार में ऑर्डर के लिए प्राइस रेंज पर प्रतिबंध लगाएगा. साथ ही ट्रेडिंग सिस्टम ऑप्शन कांट्रैक्ट्स के लिए रेफरेंस प्राइस के 60 प्रतिशत और फ्यूचर्स कांट्रैक्ट्स के लिए रेफरेंस प्राइस के 3 प्रतिशत के अंदर लिमिट प्राइस ऑर्डर्स को स्वीकार करेगा. इस प्राइस रेंज के बाहर दिए गए ऑर्डर स्वीकार नहीं किए जाएंगे. 

इसे भी पढ़ें-IPL 2024: इस करोड़पति खिलाड़ी की युवी ने क्यों लगाई क्लास, Pat Cummins ने भी कही ये बात?

13 अप्रैल को मॉक ट्रेडिंग सेशन

बीएसई ने नए मेकैनिज्म के सुचारु कार्यान्वयन के लिए और मार्केट पार्टिसिपेंट्स को बदलावों से परिचित कराने के लिए 13 अप्रैल 2024 को एक मॉक ट्रेडिंग सेशन रखा है. इसमें मार्केट पार्टिसिपेंट्स को एलपीसी मैकेनिज्म से परिचय कराया जाएगा. बताया जाएगा कि एलपीसी मैकेनिज्म का उद्देश्य असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों से रक्षा करना और अनियमित ट्रेड को रोकना है. जब किसी ऑर्डर की कीमत निर्धारित प्राइस रेंज से बाहर होगी, तो सिस्टम अपने आप आर्डर को रिजेक्ट कर देगा.

एनएसई पहले ही लागू कर चुका है ऐसा मेकैनिज्म

बीएसई ने कहा है कि वह समय-समय पर इन एनहैन्समेंट के इस्तेमाल का रिव्यू कर सकता है और मार्केट पार्टिसिपेंट्स की प्रतिक्रिया के आधार पर वह जरूरी समझे जाने पर आगे और बदलाव लागू कर सकता है. आपको बता दें, अक्टूबर 2022 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने भी फ्री ट्रेडिंग रिस्क कंट्रोल को मजबूत करने और व्यवस्थित ट्रेडिंग सुनिश्चित करने के लिए अपने फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में ऐसा ही एलपीसी मेकैनिज्म पेश किया था.
 


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