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ब्रिटेन से भारतीयों के लिए आ सकती है ये बुरी खबर, जानें क्या है नई सरकार का प्लान
पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में UK जाने वालों में भारतीयों की भी अच्छी-खासी तादाद रहती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
ब्रिटेन की नई सरकार इमिग्रेशन लिमिट को कम करने की योजना पर काम कर रही है. भारतीय मूल की ब्रिटिश गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन (Suella Braverman) ने संकेत दिया है कि सरकार आव्रजन सीमा कम करने को लेकर गंभीर है. यदि ऐसा होता है, तो भारतीयों को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा. क्योंकि पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में UK जाने वालों में भारतीयों की भी अच्छी-खासी तादाद रहती है.
बढ़ रही आश्रितों की संख्या
ब्रिटिश गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ब्रिटेन में लो-स्किल्ड माइग्रेंट की संख्या काफी ज्यादा है. इसके अलावा, ऐसे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट्स भी बड़ी संख्या में हैं, जो अपने साथ आश्रितों को लेकर आते हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने चुनावी अभियान के दौरान इमिग्रेशन कम करने का जो वादा किया था, वह उस पर कायम हैं.
वित्त मंत्री ने भी दिए संकेत
गृहमंत्री ने कहा कि इमिग्रेशन को कम करना सरकार के सभी वरिष्ठ मंत्रियों का साझा उद्देश्य है. इसी तरह, वित्त मंत्री wasi Kwarteng ने 23 सितंबर को कहा था कि सरकार विकास को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत आव्रजन नीति की समीक्षा करना चाहती है. बिज़नेस समूहों की तरफ से शिकायत मिली है कि Brexit के बाद के नियम कम वेतन वाली नौकरियों के लिहाज से बहुत प्रतिबंधात्मक थे. इससे यह काफी हद तक स्पष्ट हो जाता है कि ब्रिटेन की सरकार आने वाले दिनों में इमिग्रेशन लिमिट को कम कर सकती है.
सुएला ने दिया ये तर्क
सुएला ब्रेवरमैन के मुताबिक, ब्रिटेन में लो-स्किल्ड वर्कर्स बहुत ज्यादा हैं. साथ ही यहां बड़ी संख्या में दूसरे देशों से छात्र आते हैं, जिनके साथ डिपेंडेंट भी होते हैं. ऐसे लोग या तो कोई नौकरी नहीं करते और यदि करते भी हैं, तो वो लो-स्किल्ड जॉब्स होती हैं. इसलिए इनका ब्रिटेन के आर्थिक विकास में कोई योगदान नहीं है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) के कर्मचारियों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन गैर-EU श्रमिकों की संख्या में इजाफा हुआ है और इसमें भारतीयों का बड़ा हिस्सा है. ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के सबसे हालिया आंकड़ों के अनुसार, जून 2021 तक ब्रिटेन में दूसरे देशों से आने वालों की संख्या 239,000 थी.
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