होम / बिजनेस / Brightcom Group को लगा झटका, 15 जून से नहीं कर पाएंगे इस शेयर में ट्रेडिंग
Brightcom Group को लगा झटका, 15 जून से नहीं कर पाएंगे इस शेयर में ट्रेडिंग
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने ब्राइटकॉम ग्रुप (Brightcom Group) के शेयर पर बैन लगाने का फैसला लिया है. अब ट्रेडर्स इसके शेयर में ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने ब्राइटकॉम ग्रुप (Brightcom Group) को जोरदार झटका दिया है. दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग को आगामी 14 जून से सस्पेंड यानी बंद करने का निर्देश जारी किया है. क्या आप जानते हैं एनएसई ने से फैसला क्यों लिया है? अगर नहीं, तो चलिए आपको इसका कारण बताते हैं.
शेयर खरीद व बेच नहीं पाएंगे ट्रेडर्स
एनएसई द्वारा लगाए इस बैन के बाद अब ट्रेडर्स ब्राइटकॉम के शेयर को खरीद या बेच नहीं पाएंगे. एनएसई ने कहा है कि ब्राइटकॉम ग्रुप जब तक उसके मास्टर सर्कुलर का पालन नहीं करता है, तब तक उसके शेय़रों पर बैन जारी रहेगा.
Z कैटेगरी से भी हटाया
एनएसई द्वारा जारी किए सर्कुलर में कहा गया है कि सस्पेंशन के 15 दिनों बाद मास्टर सर्कुलर का पालन नहीं करने वाली कंपनी के शेयरों में अगले 6 महीनों तक हर हफ्ते के पहले कारोबारी दिन ट्रेड फॉर ट्रेड के आधार पर ट्रेड की अनुमति दी जाएगी. इसके साथ ही ग्रुप के शेयरों को एनएसई ने Z कैटेगरी में भी डाल दिया है.
इसे भी पढ़ें-लोन लेकर महंगे फोन खरीदने में आगे भारतीय, जानें किस फोन की हो रही ज्यादा डिमांड?
क्यों लगाया बैन?
एनएसई ने कहा है कि ब्राइटकॉम ने लगातार 2 तिमाहियों यानी सितंबर 2023 और दिसंबर 2023 तिमाही तक सेबी (SEBI) के डिस्क्लोजर नियमों का पालन नहीं किया है. इसलिए ब्राइटकॉम लिमिटिड के शेयरों में 14 जून से कारोबार को सस्पेंड कर दिया जाएगा. इससे पहले फरवरी 2024 में सेबी ने प्रेफरेंशियल आधार पर शेयरों के किए गए अलॉटमेंट में अनियमितता से जुड़े मामले में समूह के प्रमोटर सुरेश कुमार रेड्डी पर शेयर बाजार में लगे बैन को हटाने से इंकार कर दिया था. इसके अलावा प्रमोटर सुरेश कुमार रेड्डी पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध किसी भी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल होने पर भी रोक लगा दी थी.
सेबी की सख्ती के बाद हटाए थे सीएमडी
सेबी की सख्ती के बाद अगस्त 2023 में ग्रुप ने अपने चेयरमैन और एमडी सुरेश कुमार रेड्डी और सीएफओ नारायण राजू को पद से हटा दिया था. सेबी के अनुसार कंपनी ने न सिर्फ अकाउंटिंग फ्रॉड किया है, बल्कि शेयरों के प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट मामले में बैंक अकाउंट स्टेटमेंट में भी हेराफेरी की है. इसके बाद से ही सेबी ने लगातार कंपनी पर सख्ती बनाई हुई है.
टैग्स