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वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी: पहली तिमाही में 22% बढ़ी मांग, 3PL कंपनियां बनीं प्रमुख चालक

रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन West Asia संकट और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं निकट भविष्य में विकास की गति को प्रभावित कर सकती हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

कोलियर्स (Colliers) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग सेक्टर में साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च) के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. इस अवधि में ग्रेड A स्पेस की लीजिंग सालाना आधार पर 22% बढ़कर 1.1 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई, जो देश के शीर्ष आठ शहरों में दर्ज की गई.

3PL कंपनियों का दबदबा

थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) कंपनियां इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह रहीं. कुल लीजिंग में इनकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई रही, जो करीब 35 लाख वर्ग फुट है.
पिछले साल की तुलना में 3PL कंपनियों की लीजिंग 1.8 गुना बढ़ी है, जिसका कारण नेटवर्क विस्तार, लॉजिस्टिक्स आउटसोर्सिंग और सप्लाई चेन का आधुनिकीकरण है.

प्रमुख शहरों में मांग का वितरण

Delhi NCR और Chennai इस सेक्टर के सबसे बड़े डिमांड सेंटर बने रहे. जहां दिल्ली NCR में 28% हिस्सेदारी और चेन्नई में 21% हिस्सेदारी हो गई रहै. वहीं, Bengaluru और Hyderabad में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जहां लीजिंग गतिविधियां पिछले साल की तुलना में 2–3 गुना तक बढ़ीं. माइक्रो-मार्केट स्तर पर बेंगलुरु का होस्कोटे-नरसापुरा क्षेत्र 14 लाख वर्ग फुट के साथ सबसे आगे रहा, जबकि भिवंडी में करीब 11 लाख वर्ग फुट लीजिंग दर्ज हुई.

ई-कॉमर्स और ऑटो सेक्टर का योगदान

ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर इस वृद्धि के प्रमुख योगदानकर्ता रहे. दोनों क्षेत्रों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 32% रही और प्रत्येक ने 15 लाख वर्ग फुट से अधिक स्पेस लिया. इसके अलावा FMCG और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की लीजिंग में भी सालाना आधार पर दोगुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो सेक्टर में विविधता को दर्शाता है.

बड़े सौदों का दबदबा, सप्लाई ज्यादा

बड़े आकार के सौदे (2 लाख वर्ग फुट से अधिक) बाजार में हावी रहे और कुल लीजिंग का 48% हिस्सा बने, जो 53 लाख वर्ग फुट है.

प्रमुख डील्स में शामिल हैं.

1.Honda Motors – बेंगलुरु और दिल्ली NCR
2. Campa Cola – कोलकाता
3. Safexpress – दिल्ली NCR

सप्लाई में 33% बढ़ोतरी

सप्लाई के मोर्चे पर भी तेजी रही. नई परियोजनाएं सालाना आधार पर 33% बढ़कर 1.25 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गईं. इसमें दिल्ली NCR और बेंगलुरु का योगदान लगभग आधा रहा, जबकि हैदराबाद में भी सप्लाई में तेज उछाल देखा गया.

खाली स्थान (Vacancy) बढ़ा, किराए स्थिर

सप्लाई लगातार मांग से अधिक रहने के कारण वेयरहाउसिंग स्पेस में खालीपन (vacancy) बढ़कर 16.7% हो गया, जो करीब 360 बेसिस पॉइंट की वृद्धि है.
हालांकि, प्रमुख शहरों में किराए स्थिर बने रहे, जबकि कुछ सक्रिय माइक्रो-मार्केट्स में हल्की बढ़ोतरी देखी गई.

रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन West Asia संकट और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं निकट भविष्य में विकास की गति को प्रभावित कर सकती हैं. वहीं, घरेलू विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने वाली नीतियां आने वाले समय में मांग को बनाए रखने में सहायक होंगी.

 


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