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होर्मुज में बाधा बर्दाश्त नहीं, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च: PM मोदी
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया की नजर भारत की रणनीति और प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश की स्थिति और रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रधानमंत्री ने यह भी अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर संसद से एकजुट संदेश दुनिया तक पहुंचना चाहिए.
वैश्विक संकट का भारत पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बन चुका है. इसका सीधा असर विश्व अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ रहा है. भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति नई चुनौतियां लेकर आई है.
उन्होंने बताया कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी न हो. इसके लिए भारत अब 40 से अधिक देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है, जिससे आपूर्ति में स्थिरता बनी रहे.
होर्मुज स्ट्रेट पर स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा को भारत स्वीकार नहीं करेगा. यह मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी अवरोध का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत की चिंताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखने की जरूरत है.
भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी
सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अब तक करीब 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं. उन्होंने विशेष रूप से बताया कि Iran से 1000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं.
खाड़ी देशों में भारतीयों की बड़ी मौजूदगी
प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. यहां एक करोड़ से अधिक भारतीय काम करते हैं और भारत का इस क्षेत्र के साथ बड़ा व्यापारिक संबंध है.
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र से भारत को कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है. साथ ही भारतीय जहाज और क्रू भी बड़ी संख्या में यहां सक्रिय हैं, जिससे भारत की चिंता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती हैं.
ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराता खतरा
पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि मौजूदा संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. उन्होंने बताया कि संघर्ष से पहले होर्मुज के रास्ते रोजाना 13 लाख बैरल तेल और 85 प्रतिशत से ज्यादा LPG भारत आता था, लेकिन अब जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.
इसके बावजूद सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. देश में LPG के घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है और उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है.
आयात के स्रोत बढ़ाए, भंडारण मजबूत
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है. पहले जहां 27 देशों से आयात होता था, अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है. उन्होंने यह भी बताया कि देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन का सामरिक ऊर्जा भंडार मौजूद है. इसके साथ ही टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और समन्वय किया जा रहा है.
उच्चस्तरीय समीक्षा और कूटनीतिक पहल
रविवार को प्रधानमंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा की गई. बैठक में सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को सुचारू बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया.
इसके अलावा, मसूद पेजेशकियन से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति का समर्थक है और हर हाल में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.
एकजुटता का संदेश जरूरी
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने संसद से अपील की कि इस गंभीर मुद्दे पर देश की एकजुट आवाज दुनिया तक पहुंचनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता स्पष्ट है, ऊर्जा सुरक्षा, नागरिकों की रक्षा और वैश्विक शांति.
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