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IPO लाने वाली कंपनियों को बड़ी राहत, सेबी ने मंजूरी अवधि बढ़ाई और MPS नियमों में दी ढील

सेबी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब बाजार अनिश्चितता और वैश्विक जोखिमों से जूझ रहा है. IPO और MPS नियमों में दी गई यह अस्थायी राहत कंपनियों को न केवल राहत देगी, बल्कि पूंजी बाजार में स्थिरता लाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

शेयर बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव और कमजोर निवेशक भावना के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनियों को बड़ी राहत दी है. नियामक ने IPO मंजूरी की वैधता अवधि बढ़ाने के साथ-साथ न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) नियमों में एकबारगी ढील दी है. इस फैसले से बाजार में उतरने की तैयारी कर रही कंपनियों को मौजूदा अनिश्चित माहौल में बेहतर रणनीति बनाने का मौका मिलेगा.

IPO मंजूरी की वैधता बढ़ाई गई

सेबी ने IPO लाने की तैयारी कर रही कंपनियों के लिए ‘ऑब्जर्वेशन लेटर’ की वैधता अवधि में 6 महीने का विस्तार किया है. यह राहत खासतौर पर उन कंपनियों के लिए है जिनकी मंजूरी की समयसीमा 30 सितंबर 2026 तक समाप्त हो रही थी. मौजूदा नियमों के अनुसार, IPO मंजूरी पत्र 12 महीने के लिए वैध होता है. यदि इस अवधि में कंपनी इश्यू नहीं ला पाती, तो उसे फिर से दस्तावेज दाखिल करने पड़ते हैं. नई छूट से इस प्रक्रिया के दोहराव से बचाव होगा और कंपनियों को समय मिलेगा.

किन शर्तों के साथ मिलेगी छूट

हालांकि यह राहत बिना शर्त नहीं है. कंपनियों को अपने IPO दस्तावेज अपडेट कर दोबारा जमा करने होंगे. इसके साथ ही लीड मैनेजर को यह प्रमाणित करना होगा कि सभी नियमों का पालन किया गया है. यह कदम उद्योग संगठनों की मांग और बाजार में बनी अनिश्चितता को देखते हुए उठाया गया है.

भू-राजनीतिक तनाव का असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते कंपनियों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच आसान नहीं रही है. कई कंपनियों ने अपने IPO टाल दिए, संशोधित किए या वापस ले लिए, ऐसे माहौल में नियामकीय समयसीमा का दबाव कंपनियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन रहा था, जिसे कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है.

MPS नियमों में भी राहत

सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) नियमों का पालन नहीं कर पाने वाली कंपनियों को भी एकबारगी राहत दी है. यह छूट 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच लागू होगी. इस दौरान स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी को किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए हैं. पहले से की गई कार्रवाई को भी वापस लेने को कहा गया है.

एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) के चेयरमैन महावीर लुणावत के अनुसार, यह फैसला कंपनियों को बाजार की स्थिति का बेहतर आकलन करने और सही समय पर IPO लाने में मदद करेगा. उनका मानना है कि बढ़ती अस्थिरता के बीच यह छूट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.

प्राइम डेटाबेस के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में 112 IPO के जरिए कंपनियों ने रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.62 लाख करोड़ रुपये था. फिलहाल 144 कंपनियां करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने के लिए तैयार हैं, जबकि 63 कंपनियां नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं.

निवेशकों की भागीदारी में कमी

जानकारी के अनुसार हाल के महीनों में IPO के बाद कमजोर प्रदर्शन और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण खुदरा निवेशकों की भागीदारी में कमी देखी गई है. यही वजह है कि कुछ कंपनियों ने अपनी मंजूरी की अवधि समाप्त होने दी, जबकि कई ने अपने ड्राफ्ट पेपर वापस ले लिए.

 


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