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कोयला संकट के बीच बड़ी राहत, कोल इंडिया ने 40% बढ़ाया उत्पादन, बिजली घरों को सप्लाई भी तेज
बारिश थमने के साथ कोयला उत्पादन में तेज उछाल, 8 सितंबर को 1.91 मिलियन टन पहुंचा उत्पादन; बिजली क्षेत्र को सप्लाई 27 फीसदी बढ़कर 1.74 मिलियन टन प्रतिदिन हुई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago
देश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति पर दबाव के बीच कोयला क्षेत्र से राहत की खबर सामने आई है. बारिश की रफ्तार कम होने के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयला उत्पादन और सप्लाई दोनों में तेजी कर दी है. 8 सितंबर को कंपनी का कुल कोयला उत्पादन 1.91 मिलियन टन रहा, जो सितंबर के शुरुआती तीन दिनों के औसत उत्पादन से करीब 40 फीसदी अधिक है. इसके साथ ही बिजली क्षेत्र को कोयले की दैनिक सप्लाई भी 27 फीसदी बढ़कर 1.74 मिलियन टन हो गई है.
बिजली घरों को सप्लाई में 27 फीसदी बढ़ोतरी
कोयला उत्पादन में तेजी का सीधा असर थर्मल पावर प्लांट्स को होने वाली सप्लाई पर पड़ा है. सितंबर की शुरुआत में बिजली क्षेत्र को रोजाना करीब 1.37 मिलियन टन कोयला भेजा जा रहा था, जो 8 सितंबर को बढ़कर 1.74 मिलियन टन प्रतिदिन हो गया. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब देश के 58 थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले के कम स्टॉक को लेकर बिजली उत्पादन पर दबाव की आशंका जताई गई थी.
NCL ने बढ़ाया उत्पादन
कोल इंडिया की सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. NCL ने 8 सितंबर को करीब 3 लाख टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि सितंबर की शुरुआत में उसका दैनिक उत्पादन लगभग 1.8 लाख टन था.
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण NCL की खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ था. बारिश कमजोर पड़ने के बाद खदानों से पानी निकालने और उत्पादन बहाल करने का काम तेज कर दिया गया. साथ ही खदानों के अंदर की सड़कों की मरम्मत कर कोयले को लोडिंग प्लांट और रेलवे साइडिंग तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी तेज की गई.
NCL के कुल कोयला उत्पादन का करीब 87 फीसदी हिस्सा बिजली क्षेत्र को जाता है. इसकी सप्लाई मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बिजली संयंत्रों को की जाती है. चालू वित्त वर्ष में 8 सितंबर तक NCL का उत्पादन 51.43 मिलियन टन और कुल सप्लाई करीब 55 मिलियन टन हो चुकी है.
देश में 123 मिलियन टन से ज्यादा कोयला उपलब्ध
बिजली संकट की आशंकाओं के बीच केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी देश में पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने की जानकारी दी है. उनके मुताबिक, खदानों, ट्रांजिट और थर्मल पावर प्लांट्स को मिलाकर देश में 123 मिलियन टन से अधिक कोयला उपलब्ध है.
इसमें करीब 100 मिलियन टन कोयला खदानों या ढुलाई के रास्ते में है, जबकि थर्मल पावर प्लांट्स के पास लगभग 23.7 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद है. सरकार का कहना है कि यह स्टॉक करीब 51 दिनों की बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.
बारिश कम होने से आगे और सुधर सकती है स्थिति
इस साल मॉनसून के कारण कोयला उत्पादन और बिजली क्षेत्र दोनों पर दबाव देखने को मिला. कई इलाकों में भारी बारिश से खदानों में पानी भरने के कारण उत्पादन और कोयले की ढुलाई प्रभावित हुई. वहीं, कम बारिश वाले इलाकों में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल के इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ी.
इसके अलावा उमस और गर्मी के कारण घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से भी बिजली खपत पर दबाव रहा. कम बारिश का असर हाइड्रो पावर उत्पादन पर भी पड़ा, जिससे थर्मल पावर पर निर्भरता बढ़ी.
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, देश में बिजली की कमी रविवार को 19.57 मिलियन यूनिट रही. इससे पहले 5 सितंबर को बिजली की कमी 28 मिलियन यूनिट से अधिक दर्ज की गई थी.
बारिश की स्थिति में और सुधार होने के साथ कोयला उत्पादन, ढुलाई और बिजली संयंत्रों को सप्लाई में और तेजी आने की उम्मीद है. इससे आने वाले दिनों में थर्मल पावर प्लांट्स पर स्टॉक का दबाव कम हो सकता है और बिजली आपूर्ति की स्थिति भी बेहतर होने के आसार हैं.
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