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BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में होगा बड़ा शिखर सम्मेलन, जानिए क्या रहेगा एजेंडा
भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. यह चौथी बार है जब भारत को इस समूह की अध्यक्षता मिली है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह अहम मंच इस बार वैश्विक विकास, सुरक्षा, तकनीक और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगा. भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. बता दें, भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. यह चौथी बार है जब भारत को इस समूह की अध्यक्षता मिली है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है.
क्या है भारत की BRICS थीम?
भारत ने इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ यानी ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता’ को थीम बनाया है. सम्मेलन और पूरे साल आयोजित होने वाली गतिविधियों में इन्हीं चार क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है.
1. लचीलापन
इसके तहत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही आपदा प्रबंधन और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी.
2. नवाचार
तकनीक और इनोवेशन भी ब्रिक्स एजेंडे में अहम स्थान रखेंगे. स्टार्टअप्स, MSMEs, विज्ञान एवं तकनीक, रिसर्च, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर होगा.
3. सहयोग
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना भारत की अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं में है. इसके साथ ही वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे.
4. टिकाऊ विकास
क्लीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. भारत का जोर ऐसे विकास मॉडल पर है जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे.
पूरे साल हुईं 350 से ज्यादा बैठकें
भारत की ब्रिक्स (Brics Summit) अध्यक्षता केवल शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रही. पूरे साल अलग-अलग स्तरों पर 350 से ज्यादा बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए. इनमें विदेश मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, विभिन्न मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें शामिल हैं. इसके अलावा कई वर्किंग ग्रुप, बिजनेस फोरम और नागरिक समाज से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. इन बैठकों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश की गई.
सुरक्षा और आतंकवाद पर भी चर्चा
ब्रिक्स के एजेंडे में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे हैं. जून में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ सूचना तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. वहीं, मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और ब्रिक्स के भविष्य को लेकर रोडमैप पर विचार किया गया.
ग्लोबल साउथ पर भारत का फोकस
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के मुद्दों को प्रमुखता देने की कोशिश की है. किसानों, शहरों के विकास, कुशल कामगारों, महिला नेतृत्व वाले विकास, सस्ती ऊर्जा, पारंपरिक चिकित्सा और आपदा जोखिम कम करने जैसे विषयों को एजेंडे में जगह दी गई है. इसके अलावा ड्रग्स और भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
आम लोगों को भी BRICS से जोड़ने की कोशिश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने ब्रिक्स को केवल सरकारों और राजनयिकों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों और युवाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया है. इसके तहत ब्रिक्स सॉलिडेरिटी रन, फिल्म फेस्टिवल, ब्रिक्स बाजार और क्विज जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं. इन कार्यक्रमों के जरिए युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सांस्कृतिक संस्थाओं को भी ब्रिक्स मंच से जोड़ने की कोशिश की गई है.
क्यों अहम है BRICS Summit?
ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है. ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और भू-राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अहम अवसर होगा.
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