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RBI का बड़ा प्रस्ताव: डिजिटल वॉलेट में ₹2 लाख तक की लिमिट तय

ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी डिजिटल वॉलेट और कार्ड्स के नियमों में बड़े बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्ताव के मुताबिक अब किसी भी वॉलेट में ₹2 लाख से ज्यादा बैलेंस रखने की अनुमति नहीं होगी. इस मसौदे पर 22 मई 2026 तक स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं.

RBI ने डिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित बनाने के लिए PPI फ्रेमवर्क में व्यापक बदलाव की तैयारी की है. PPI ऐसे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं. जिनमें पहले पैसे लोड किए जाते हैं और फिर उसी बैलेंस का उपयोग खरीदारी या ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है. ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है. अब महीने में ₹10,000 से ज्यादा कैश लोड नहीं किया जा सकेगा.

RBI ने PPI को अलग अलग कैटेगरी में बांटा है. जिनमें जनरल पर्पज, गिफ्ट PPI, ट्रांजिट PPI (मेट्रो/बस कार्ड) और NRI PPI शामिल हैं. प्रस्ताव के मुताबिक.

1. गिफ्ट PPI की अधिकतम सीमा ₹10,000 होगी
2. ट्रांजिट PPI की सीमा ₹3,000 तय की गई है

कौन जारी कर सकेगा PPI?
ड्राफ्ट में कहा गया है कि वे बैंक जिन्हें डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति मिली है. वे RBI के पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम विभाग (DPSS) को सूचना देकर PPI जारी कर सकते हैं. इसके अलावा गैर बैंकिंग कंपनियां भी RBI की मंजूरी के बाद PPI जारी कर सकेंगी. हालांकि गैर बैंकिंग संस्थाओं के लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹5 करोड़ होना जरूरी होगा. और उन्हें अपने वैधानिक ऑडिटर से प्रमाण पत्र भी देना होगा.

सुरक्षा और कस्टमर प्रोटेक्शन पर फोकस
इस नए ड्राफ्ट में ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी को मजबूत करने. रिफंड प्रोसेस को स्पष्ट बनाने और शिकायतों के तेजी से निपटारे के लिए भी नियम शामिल किए गए हैं. RBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित बनाना है. अब इस ड्राफ्ट पर 22 मई तक इंडस्ट्री से फीडबैक लिया जाएगा. जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते हैं.
 


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