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ऊर्जा संकट के बीच बड़ा दांव: 2.56 करोड़ टन कोयला नीलामी को तैयार कोल इंडिया
अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के खरीदार भी सीधे ई-नीलामी में हिस्सा ले सकेंगे. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होगी और कोयले के अतिरिक्त भंडार का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
देश में ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. पब्लिक सेक्टर की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया (Coal India Limited) अप्रैल महीने में 2.56 करोड़ टन कोयले की ई-नीलामी करने जा रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन आपूर्ति में बाधाओं के बीच यह फैसला उद्योगों को राहत देने वाला साबित हो सकता है.
ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी कोयले की मांग
पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर भारत के ऊर्जा सेक्टर पर पड़ा है, जिससे कोयले की मांग में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. साथ ही आयातित कोयले की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति और ज्यादा अहम हो गई है.
फरवरी से मार्च तक तेज हुई नीलामी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोल इंडिया ने पिछले महीनों में भी आक्रामक रुख दिखाया है. फरवरी में कंपनी ने करीब 2.05 करोड़ टन कोयले की पेशकश की थी, जबकि मार्च में यह बढ़कर 3.25 करोड़ टन हो गई. इस बढ़ोतरी से साफ है कि कंपनी बाजार की मांग को पूरा करने के लिए लगातार आपूर्ति बढ़ा रही है.
SWMA मॉडल से आसान और पारदर्शी नीलामी
कोल इंडिया ‘सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक’ (SWMA) प्लेटफॉर्म के जरिए नीलामी करती है. 2022 में शुरू किया गया यह सिस्टम हाजिर, विशेष हाजिर और फॉरवर्ड नीलामी को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है. इससे खरीदारों को आसान प्रक्रिया, अधिक पारदर्शिता और बाजार आधारित कीमत का फायदा मिलता है.
किन कंपनियों से कितनी सप्लाई?
अप्रैल की नीलामी में कोल इंडिया की विभिन्न सहायक कंपनियां बड़ा योगदान देंगी. महानदी कोलफील्ड्स 85 लाख टन, ईस्टर्न कोलफील्ड्स 47 लाख टन, भारत कोकिंग कोल 38 लाख टन, सेंट्रल कोलफील्ड्स 32 लाख टन और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स 30 लाख टन कोयले की पेशकश करेंगी. इसके अलावा वेस्टर्न कोलफील्ड्स 20 लाख टन, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स 6 लाख टन और नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड 20 हजार टन कोयले की आपूर्ति करेगी.
विदेशी खरीदारों के लिए भी खुला रास्ता
अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के खरीदार भी सीधे ई-नीलामी में हिस्सा ले सकेंगे. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होगी और कोयले के अतिरिक्त भंडार का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
देश के कोयला उत्पादन में 80% हिस्सेदारी
कोल इंडिया देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा संभालती है. ऐसे में कंपनी की यह मेगा नीलामी ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़े कदम से उद्योगों को ईंधन की कमी से राहत मिलेगी, बिजली उत्पादन स्थिर रहेगा और महंगे आयातित कोयले पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर, यह नीलामी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
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