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ओडिशा में वेदांता की बड़ी पहल, एल्युमीनियम पार्क के लिए दो कंपनियों से समझौता
वेदांता का यह समझौता केवल एक औद्योगिक विस्तार नहीं, बल्कि भारत में एल्युमीनियम सेक्टर के लिए एक नए इकोसिस्टम की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
देश की प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता लिमिटेड ने ओडिशा में अपने प्रस्तावित झारसुगुड़ा एल्युमीनियम पार्क को लेकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने इस पार्क में औद्योगिक गतिविधियों की शुरुआत के लिए दो प्रमुख कंपनियों के साथ शुरुआती समझौते (MoU) किए हैं. यह कदम ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.
सिंघल स्टील और स्कॉट-एल के साथ साझेदारी
शुक्रवार को वेदांता ने सिंघल स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड और स्कॉट-एल मेटकॉन प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों के तहत दोनों कंपनियां झारसुगुड़ा स्थित एल्युमीनियम पार्क के भीतर एल्युमीनियम-आधारित विनिर्माण इकाइयों की स्थापना करेंगी. यह पहली बार है जब दिसंबर 2022 में पार्क की आधारशिला रखे जाने के बाद किसी तरह की डाउनस्ट्रीम औद्योगिक साझेदारी को औपचारिक रूप दिया गया है.
253 एकड़ में विकसित हो रहा है एल्युमीनियम पार्क
वेदांता का यह प्रस्तावित ‘एल्युमीनियम पार्क’ कुल 253 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. इसके पहले चरण में लगभग 56 एकड़ क्षेत्र को डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए तैयार किया जा चुका है. इस पार्क को एक आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें एल्युमीनियम से जुड़ी विभिन्न उत्पादन और प्रोसेसिंग इकाइयों को एक ही स्थान पर विकसित किया जाएगा.
पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक मॉडल
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका ग्रीन और सस्टेनेबल औद्योगिक मॉडल है. पार्क को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि री-मेल्टिंग की जरूरत कम हो और लॉजिस्टिक्स लागत भी घटे. कंपनी का अनुमान है कि यह पहल हर साल लगभग 60,000 से 70,000 टन तक कार्बन उत्सर्जन में कमी ला सकती है, जिससे यह एक पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक मॉडल के रूप में उभरेगा.
ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब बनाने की दिशा में कदम
पूरी तरह विकसित होने के बाद यह पार्क देश के सबसे बड़े मेटल पार्कों में शामिल हो सकता है. इसका उद्देश्य एल्युमीनियम आधारित उद्योगों के लिए एकीकृत और विश्व-स्तरीय इकोसिस्टम तैयार करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी.
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