होम / बिजनेस / ओडिशा में वेदांता की बड़ी पहल, एल्युमीनियम पार्क के लिए दो कंपनियों से समझौता

ओडिशा में वेदांता की बड़ी पहल, एल्युमीनियम पार्क के लिए दो कंपनियों से समझौता

वेदांता का यह समझौता केवल एक औद्योगिक विस्तार नहीं, बल्कि भारत में एल्युमीनियम सेक्टर के लिए एक नए इकोसिस्टम की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

देश की प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता लिमिटेड ने ओडिशा में अपने प्रस्तावित झारसुगुड़ा एल्युमीनियम पार्क को लेकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने इस पार्क में औद्योगिक गतिविधियों की शुरुआत के लिए दो प्रमुख कंपनियों के साथ शुरुआती समझौते (MoU) किए हैं. यह कदम ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.

सिंघल स्टील और स्कॉट-एल के साथ साझेदारी

शुक्रवार को वेदांता ने सिंघल स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड और स्कॉट-एल मेटकॉन प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों के तहत दोनों कंपनियां झारसुगुड़ा स्थित एल्युमीनियम पार्क के भीतर एल्युमीनियम-आधारित विनिर्माण इकाइयों की स्थापना करेंगी. यह पहली बार है जब दिसंबर 2022 में पार्क की आधारशिला रखे जाने के बाद किसी तरह की डाउनस्ट्रीम औद्योगिक साझेदारी को औपचारिक रूप दिया गया है.

253 एकड़ में विकसित हो रहा है एल्युमीनियम पार्क

वेदांता का यह प्रस्तावित ‘एल्युमीनियम पार्क’ कुल 253 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. इसके पहले चरण में लगभग 56 एकड़ क्षेत्र को डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए तैयार किया जा चुका है. इस पार्क को एक आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें एल्युमीनियम से जुड़ी विभिन्न उत्पादन और प्रोसेसिंग इकाइयों को एक ही स्थान पर विकसित किया जाएगा.

पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक मॉडल

इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका ग्रीन और सस्टेनेबल औद्योगिक मॉडल है. पार्क को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि री-मेल्टिंग की जरूरत कम हो और लॉजिस्टिक्स लागत भी घटे. कंपनी का अनुमान है कि यह पहल हर साल लगभग 60,000 से 70,000 टन तक कार्बन उत्सर्जन में कमी ला सकती है, जिससे यह एक पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक मॉडल के रूप में उभरेगा.

ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब बनाने की दिशा में कदम

पूरी तरह विकसित होने के बाद यह पार्क देश के सबसे बड़े मेटल पार्कों में शामिल हो सकता है. इसका उद्देश्य एल्युमीनियम आधारित उद्योगों के लिए एकीकृत और विश्व-स्तरीय इकोसिस्टम तैयार करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी.

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

21 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

21 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

22 hours ago

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

23 hours ago

पावर प्लांट्स में सिर्फ 9 दिन का कोयला, 42% घटा स्टॉक; लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी चुनौती

बिजली की बढ़ती मांग और परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का दबाव बढ़ा, 190 में से 51 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

1 day ago


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

23 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

21 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

21 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

22 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

1 day ago