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भारत-अमेरिका की बड़ी रक्षा डील, अब देश में बनेंगे लड़ाकू विमानों के इंजन

समझौते के तहत शुरुआती चरण में भारत में 99 इंजन बनाने की योजना है. इसके लिए देश में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जो कॉन्ट्रैक्ट फाइनल होने के करीब दो साल के भीतर शुरू हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. हिंदुस्तान  एयरोनॉटिक्स (Hindustan Aeronautics Limited) और जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) के बीच ऐतिहासिक समझौते के तहत अब भारत में ही अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के इंजन बनाए जाएंगे. इस डील में तकनीक हस्तांतरण पर सहमति बन चुकी है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी और चीन-पाकिस्तान जैसी चुनौतियों से निपटने में देश की सामरिक क्षमता और मजबूत होगी.

तकनीक हस्तांतरण पर बनी सहमति

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस रक्षा समझौते का सबसे अहम हिस्सा तकनीक हस्तांतरण था, जिस पर अब दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है. इस समझौते के तहत जीई एयरोस्पेस अपने उन्नत F414 इंजन की मैन्युफैक्चरिंग तकनीक भारत को उपलब्ध कराएगी. यह तकनीक दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही है, ऐसे में इसका भारत को मिलना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा

इस डील के बाद भारत को लड़ाकू विमानों के इंजन के लिए विदेशी निर्भरता से काफी हद तक राहत मिलेगी. अब देश में ही इंजन निर्माण होने से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल रक्षा क्षेत्र ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता को भी नई ऊंचाई देगा.

वायुसेना को मिलेगी नई ताकत

भारतीय वायुसेना इस समय लड़ाकू स्क्वाड्रन की घटती संख्या की चुनौती का सामना कर रही है. ऐसे में इस समझौते के बाद घरेलू स्तर पर आधुनिक इंजनों का उत्पादन तेज होगा, जिससे नए लड़ाकू विमानों को तेजी से शामिल किया जा सकेगा. इन इंजनों का इस्तेमाल खासतौर पर HAL Tejas Mk2 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों में किया जाएगा, जिससे वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा.

99 इंजनों के निर्माण की योजना

समझौते के तहत शुरुआती चरण में भारत में 99 इंजन बनाने की योजना है. इसके लिए देश में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जो कॉन्ट्रैक्ट फाइनल होने के करीब दो साल के भीतर शुरू हो सकती है. भारतीय वायुसेना ने 120 से अधिक तेजस एमके-2 विमानों की जरूरत जताई है, ऐसे में भविष्य में इन इंजनों की मांग और बढ़ने की संभावना है.

भविष्य के फाइटर जेट्स पर भी काम

यह डील केवल मौजूदा जरूरतों तक सीमित नहीं है. भारत और अमेरिका भविष्य के उन्नत फाइटर जेट्स के लिए और भी ज्यादा ताकतवर इंजन विकसित करने पर काम कर रहे हैं. इन इंजनों का इस्तेमाल Advanced Medium Combat Aircraft जैसे प्रोजेक्ट्स में किया जा सकता है, जिससे भारत की एयर पावर और मजबूत होगी.

रखरखाव के लिए भी बड़ा कदम

समझौते में केवल नए इंजन निर्माण ही नहीं, बल्कि मौजूदा इंजनों के रखरखाव का भी प्रावधान शामिल है. पुराने F404 इंजनों के लिए भारत में ही डिपो सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे मेंटेनेंस में आसानी होगी और लागत भी कम होगी.

रणनीतिक बढ़त की ओर भारत

यह समझौता भारत के रक्षा क्षेत्र में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है. स्वदेशी निर्माण, उन्नत तकनीक और मजबूत साझेदारी के जरिए भारत न सिर्फ अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
 


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