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RBI का बड़ा फैसला: बैंकों को राहत, IFR बफर खत्म करने का प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इस फैसले से कैपिटल नियमों में ढील से बढ़ेगी लिक्विडिटी और बैंकिंग सिस्टम को सपोर्ट मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए कैपिटल कैलकुलेशन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव का ऐलान किया है. केंद्रीय बैंक ने जहां NPA से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शर्त हटाने का प्रस्ताव दिया है, वहीं ‘इन्वेस्टमेंट फ्लक्चुएशन रिजर्व’ (IFR) बफर को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस फैसले से बैंकों के लिए कैपिटल मैनेजमेंट आसान होगा और सिस्टम में लिक्विडिटी व लेंडिंग क्षमता को बल मिलेगा.
कैपिटल कैलकुलेशन में बड़ी ढील
आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि बैंकों को अब ‘कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशियो’ (CRAR) की गणना में तिमाही मुनाफे को शामिल करने के लिए पहले जैसी सख्त शर्तों का पालन नहीं करना होगा. पहले नियमों के तहत, यह तभी संभव था जब NPA के लिए की गई अतिरिक्त प्रोविजनिंग पिछले चार तिमाहियों के औसत से 25% से ज्यादा अलग न हो. अब इस शर्त को हटाने से बैंकों को अपने मुनाफे को कैपिटल में शामिल करने में अधिक लचीलापन मिलेगा. RBI जल्द ही इस पर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करेगा और हितधारकों से सुझाव मांगेगा.
IFR बफर खत्म करने की तैयारी
केंद्रीय बैंक ने ‘इन्वेस्टमेंट फ्लक्चुएशन रिजर्व’ (IFR) को खत्म करने का भी प्रस्ताव रखा है. IFR का उपयोग निवेश पोर्टफोलियो में ‘मार्क-टू-मार्केट’ नुकसान से बचाव के लिए एक अतिरिक्त बफर के रूप में किया जाता था. आरबीआई का मानना है कि मौजूदा प्रूडेंशियल नॉर्म्स, जैसे मार्केट रिस्क के लिए कैपिटल चार्ज और संशोधित निवेश वर्गीकरण ढांचा, अब इस तरह के अतिरिक्त बफर की आवश्यकता को कम करते हैं.
मजबूत होती बैंकिंग व्यवस्था
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय बैंकिंग सिस्टम की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. दिसंबर 2025 तक शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16.91% रहा, जो नियामकीय आवश्यकता से काफी ऊपर है. एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.89% पर आ गया है, जबकि नेट NPA 0.44% तक सीमित हो गया है.
NBFC सेक्टर भी मजबूत
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है. उनका CRAR 25.59% और टियर-I कैपिटल 23.71% दर्ज किया गया. साथ ही, NBFCs का ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 2.14% और नेट NPA 0.93% पर आ गया है, जो सेक्टर की बेहतर एसेट क्वालिटी को दर्शाता है.
आरबीआई का कहना है कि IFR से जुड़े नियमों में बदलाव अन्य बैंकिंग कैटेगरी पर भी लागू किए जाएंगे, ताकि नियमों में एकरूपता लाई जा सके और ऑपरेशनल चुनौतियों को कम किया जा सके. इस संबंध में विस्तृत ड्राफ्ट गाइडलाइंस जल्द जारी होने की उम्मीद है. आरबीआई के ये कदम बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत के साथ-साथ ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले माने जा रहे हैं. कैपिटल नियमों में लचीलापन और IFR बफर को हटाने से बैंकों की बैलेंस शीट पर दबाव कम होगा और वे अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी ढंग से कर्ज प्रवाह कर सकेंगे.
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