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हेल्थ इंश्योरेंस में बड़ा बदलाव: अब 1 घंटे में इलाज की मंजूरी, 3 घंटे में क्लेम सेटलमेंट

नए नियम हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता और तेजी लाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं. इससे मरीजों को समय पर इलाज मिलने के साथ-साथ क्लेम प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा आसान और भरोसेमंद होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

देश में हेल्थ इंश्योरेंस रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अब अस्पताल में इलाज के दौरान लंबा इंतजार बीते दिनों की बात हो सकता है. बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने नए नियम लागू करते हुए कैशलेस क्लेम प्रोसेसिंग के लिए सख्त समयसीमा तय कर दी है. इसका मकसद मरीजों को समय पर इलाज और बिना देरी के डिस्चार्ज सुनिश्चित करना है.

नए नियमों के अनुसार अब अस्पताल द्वारा भेजे गए कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन को 1 घंटे के भीतर मंजूरी देना अनिवार्य होगा. वहीं मरीज के डिस्चार्ज के समय फाइनल क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया अधिकतम 3 घंटे में पूरी करनी होगी. सरकार का कहना है कि यह कदम इलाज में होने वाली देरी को कम करेगा और मरीजों को बेहतर अनुभव देगा.

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में तेज ग्रोथ

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में तेजी देखी गई है. वित्त वर्ष 2024-25 में सेक्टर ने लगभग 9 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की और कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा. इस बढ़ोतरी के पीछे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता, बेहतर हेल्थकेयर फाइनेंसिंग की उपलब्धता और महंगे इलाज से आर्थिक सुरक्षा की जरूरत जैसे कारण प्रमुख हैं.

'गोल्डन ऑवर' नियम से मरीजों को राहत

नए नियमों को “गोल्डन ऑवर” अप्रोच के रूप में देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य यह है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान कागजी प्रक्रिया में देरी न हो और इलाज तुरंत शुरू हो सके. साथ ही डिस्चार्ज प्रक्रिया को भी तेज और आसान बनाया जा सके, जिससे मरीज और उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.

क्लेम सेटलमेंट रेशियो में सुधार

बीमा कंपनियों के प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2024-25 में क्लेम सेटलमेंट रेशियो 87.5 प्रतिशत रहा, जबकि 2023-24 में यह 82.46 प्रतिशत और 2022-23 में 85.66 प्रतिशत था. इससे साफ है कि अब पहले की तुलना में अधिक क्लेम मंजूर किए जा रहे हैं और सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी हुआ है.

क्यों बढ़ रहा है इंश्योरेंस प्रीमियम

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं. उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ जाता है, जिससे प्रीमियम भी बढ़ता है. इसके अलावा लोग अब गंभीर बीमारियों को ध्यान में रखते हुए ज्यादा राशि यानी अधिक सम इंश्योर्ड वाली पॉलिसी ले रहे हैं. नई पॉलिसियों में ओपीडी, वेलनेस और अन्य आधुनिक फीचर्स भी जोड़े गए हैं, जिनका असर प्रीमियम पर पड़ता है.

शिकायतों का तेजी से समाधान

बीमा भरोसा पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 93 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा उसी वित्तीय वर्ष के भीतर कर दिया गया, जो सिस्टम में सुधार का संकेत देता है.

फिर भी क्यों रिजेक्ट हो रहे हैं क्लेम

सुधारों के बावजूद कुछ क्लेम अब भी खारिज हो रहे हैं. इसके पीछे पॉलिसी की शर्तें जैसे को-पेमेंट क्लॉज, सब-लिमिट्स, रूम रेंट कैपिंग और नॉन-मेडिकल खर्च जैसे कारण होते हैं. इसलिए किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को खरीदते समय उसकी सभी शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ना और समझना बेहद जरूरी है.

 


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