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RBI का बड़ा बदलाव: 1 लाख करोड़ से ऊपर की NBFC सीधे ‘अपर लेयर’ में
RBI का यह प्रस्ताव NBFC सेक्टर में पारदर्शिता और सादगी लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. इसके लागू होने पर बड़े वित्तीय संस्थानों की निगरानी और मजबूत हो सकेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के वर्गीकरण को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. केंद्रीय बैंक मौजूदा जटिल ढांचे की जगह अब आसान और स्पष्ट व्यवस्था लागू करना चाहता है. नए प्रस्ताव के तहत जिन NBFC की कुल परिसंपत्तियां 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक होंगी, उन्हें उनकी नवीनतम ऑडिटेड बैलेंस शीट के आधार पर सीधे ‘अपर लेयर’ में रखा जाएगा. इससे वर्गीकरण की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी.
सरकारी NBFC भी होंगी शामिल
RBI ने यह भी कहा है कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की NBFC इस परिसंपत्ति सीमा को पार करती हैं, तो उन्हें भी अपर लेयर में शामिल किया जाएगा. अभी तक ऐसी कंपनियां आमतौर पर बेस या मिडिल लेयर में रखी जाती थीं.
यह प्रस्ताव फिलहाल ड्राफ्ट रूप में है. RBI ने NBFC कंपनियों, आम लोगों और अन्य हितधारकों से 4 मई 2026 तक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं. इसके बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.
मौजूदा सिस्टम क्यों बदलेगा
वर्तमान में स्केल बेस्ड रेगुलेशन (SBR) ढांचे के तहत अपर लेयर की पहचान मात्रात्मक और गुणात्मक मापदंडों के आधार पर होती है. इसमें 70 प्रतिशत वेटेज मात्रात्मक और 30 प्रतिशत गुणात्मक मापदंडों को दिया जाता है. RBI का मानना है कि यह प्रक्रिया जटिल है और इसे सरल बनाने की जरूरत है.
नई व्यवस्था के फायदे
केंद्रीय बैंक के अनुसार, केवल परिसंपत्ति के आकार के आधार पर वर्गीकरण करने से पारदर्शिता बढ़ेगी. इससे कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा और नियामकीय स्पष्टता भी बेहतर होगी.
किन कंपनियों पर असर
फिलहाल करीब 15 NBFC ‘अपर लेयर’ में शामिल हैं. इनमें बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, एलएंडटी फाइनेंस, टाटा कैपिटल, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, आदित्य बिड़ला फाइनेंस, पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और टाटा संस जैसी कंपनियां शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी NBFC को भी इस श्रेणी में शामिल करने से अपर लेयर में आने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ सकती है.
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