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GST रिटर्न फाइल करने वाले ध्यान दें! नजदीक आ गई फॉर्म भरने की आखिरी तारीख
GSTN ने जीएसटीआर-7 फॉर्म भरने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. अब टीडीएस काटने वाले सभी पंजीकृत व्यक्तियों को यह फॉर्म भरना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अगर आप भी माल एवं सेवा कर (GST) रिटर्न फाइल करते हैं, तो ये खबर आपके काम की है. दरअसल, माल एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) ने एक नई एडवाइजरी जारी की है. इसमें जीएसटी रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स के लिए फॉर्म GSTR-7 भरने की आखिरी तारीख जारी की गई है. एडवाइजरी के अनुसार जिन लोगों को यह फॉर्म भरना है, उन्हें 10 दिसंबर 2024 तक इसे क्रम से भरना होगा. बता दें. GSTR-7 उन सभी जीएसटी रजिस्टर्ड लोगों को भरना पड़ता है, जिन्हें जीएसटी कानून के तहत टीडीएस काटना होता है. अगर टैक्सेबल सामान और सेवाओं की कुल कीमत 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो तय खरीदारों को विक्रेता को भुगतान करने से पहले टीडीएस काटना होता है. तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. जीएसटीआर-7 फॉर्म क्या होता है? जीएसटीआर-7 एक ऐसा मासिक रिटर्न है जो उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं की ओर से फाइल किया जाता है, जिन्होंने किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को भुगतान करते समय जीएसटी काटकर जमा किया है. इसे सरल शब्दों में समझें तो अगर आपने किसी सप्लायर को भुगतान किया है और उस भुगतान पर जीएसटी काटा है तो आपको यह फॉर्म फाइल करना होगा. इन लोगों को भरना होगा जीएसटीआर-7 फॉर्म केंद्र सरकार ने अपने बजट 2024 में वित्त मंत्री ने धारा 39 में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा और टीडीएस कटौती करने वालों की ओर से हर महीने रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया. जीएसटी परिषद ने अपनी 53वीं बैठक में भी इसी तरह की सिफारिश की थी. होगा ये फायदा 27 सितंबर 2024 की अधिसूचना संख्या 17/2024-केंद्रीय कर के अनुसार, 1 नवंबर 2024 से GSTR-7 को क्रम से भरना जरूरी हो गया है. इसका मतलब है कि आपको अक्टूबर 2024 से शुरू करके हर महीने का रिटर्न क्रम से भरना होगा. अगर किसी महीने में आपने कोई टीडीएस नहीं काटा है तो भी आपको उस महीने के लिए 'शून्य' रिटर्न भरना होगा. इस नई एडवाइजरी का मतलब है कि जीएसटी रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स को 10 दिसंबर 2024 तक GSTR-7 भरना होगा, भले ही उन्होंने टीडीएस काटा हो या नहीं, लेकिन फॉर्म भरना तो जरूरी ही है. एक्सपर्ट्स के अनुसार GSTR-7 फॉर्म भरने से पूरी तरह से नियमों का पालन होगा, डेटा की एक्यूरेसी बढ़ेगी. जीएसटी सिस्टम में मिलान की प्रक्रिया आसान होगी.
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