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अमेरिका में बैठे Trump कैसे भारत के इन सेक्टर्स की बढ़ा सकते हैं चमक, समझिये पूरा गणित
माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते भारत के कुछ सेक्टर्स में तेजी देखने को मिल सकती है. ऐसे में उनके स्टॉक्स में भी एक्शन नज़र आ सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने की खबर सामने आते ही कल शेयर बाजार उफान पर पहुंच गया था. लेकिन आज उसकी तेजी गायब हो गई है. क्या इसे उसे बुलबुले का फूटना समझा जाए, जो कल निर्मित हुआ था? जानकारों की मानें तो बुधवार को बाजार में आई तेजी के बाद आज निवेशक मुनाफावसूली में मशगूल हैं, इसलिए मार्केट गिर रहा है. उनका यह भी कहना है कि ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी बैठने से कई सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है. ऐसे में उनसे जुड़े शेयरों में एक्शन देखने को मिल सकता है. चलिए ऐसे सेक्टर्स पर एक नज़र डालते हैं.
इन्हें मिल सकते है लाभ
कुछ जानकारों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप चीन विरोधी रहे हैं. कोरोना काल में उनके और चीन के बीच टकराव काफी बढ़ गया था. ट्रंप की चीन विरोधी नीति भारतीय मेटल उत्पादकों के लिए पॉजिटिव हो सकती है. चीन मेटल का प्रमुख निर्यातक है. वह कम दरों पर मेटल एक्सपोर्ट करता रहा है. संभव है कि डोनाल्ड ट्रंप चीन से मेटल्स के आयात पर हाई टैरिफ लगाने जैसा कदम उठाएं. यदि ऐसा होता है, तो भारतीय मेटल कंपनियों को सीधे तौर पर फायदा होगा. टाटा स्टील, JSW स्टील और हिंडालको जैसी कंपनियों को अमेरिका से अधिक निर्यात ऑर्डर मिल सकते हैं. Tata Steel के शेयर की बात करें, तो यह आज बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है. जबकि बाकी दोनों कंपनियों के शेयर लाल हैं. Hindalco का शेयर करीब 8 प्रतिशत गिर गया है.
बढ़ सकती है मैनुफैक्चरिंग
माना जा रहा है कि ट्रंप की चीन विरोधी नीति के चलते भारत में मैनुफैक्चरिंग की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि कारोबारी चीन के विकल्प तलाशेंगे. इससे कैपिटल गुड्स सेक्टर को बढ़ावा मिलने की संभावना है. इसी तरह, ट्रंप के शासनकाल में तेल बेचने वालीं और क्रूड डेरिवेटिव कंपनियों को भी लाभ हो सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ट्रंप के आने से भारतीय IT कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में नौकरियों में अमेरिकियों को प्राथमिकता देने की बात कही थी. उन्होंने IT कंपनियों से कहा था कि ऑन-साइट रोल्स के लिए स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों को भर्ती किया जाए. यदि ऐसा फिर होता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और मार्जिन पर असर पड़ सकता है.
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