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AMPIN Energy Transition ने Waaree Energies को दिया 350 MW सोलर मॉड्यूल सप्लाई ऑर्डर
G12R TOPCon मॉड्यूल से देशभर में लगेंगे AMPIN के प्रमुख प्रोजेक्ट; मार्च 2026 तक होगी सप्लाई पूरी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत की अग्रणी सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनी Waaree Energies Ltd को AMPIN Energy Transition से 350 मेगावाट का बड़ा मॉड्यूल सप्लाई ऑर्डर मिला है. यह मॉड्यूल AMPIN के देशभर में विकसित होने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में लगाए जाएंगे.
इस समझौते के तहत Waaree अपनी हाई-एफिशिएंसी G12R TOPCon मॉड्यूल सीरीज़ की सप्लाई करेगी, जिसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है. यह ऑर्डर AMPIN के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को मजबूती देगा और कंपनी की क्लीन एनर्जी तैनाती को गति देगा.
AMPIN Energy Transition के फाउंडर, एमडी और सीईओ पिनाकी भट्टाचार्य ने कहा कि Waaree के साथ यह साझेदारी कंपनी की टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ग्रोथ रणनीति को दर्शाती है.
उन्होंने कहा, “Waaree के साथ हमारी साझेदारी भारत भर में हमारे ग्राहकों के लिए हाई-परफॉर्मेंस और फ्यूचर-रेडी सोलर टेक्नोलॉजी अपनाने की हमारी रणनीति को मजबूत करती है. जैसे-जैसे हम अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रहे हैं, हमें ऐसे पार्टनर्स चाहिए जो उत्कृष्ट टेक्नोलॉजी, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और timely execution दे सकें. Waaree के G12R मॉड्यूल हमारे क्वालिटी बेंचमार्क और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों के अनुरूप हैं.”
Waaree Energies के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनील राठी ने कहा कि यह ऑर्डर कंपनी और AMPIN के बीच संबंधों को और मजबूत बनाता है. उन्होंने कहा, “हम AMPIN के 350 MW पोर्टफोलियो में सहयोग करके प्रसन्न हैं. हमारे G12R मॉड्यूल हाई एनर्जी यील्ड, बेहतरीन लो-लाइट परफॉर्मेंस और लंबे समय की विश्वसनीयता के लिए डिजाइन किए गए हैं — जो यूटिलिटी-स्केल और C&I डेवलपर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.”
कंपनी के अनुसार, TOPCon आधारित G12R मॉड्यूल अधिक ऊर्जा घनत्व, बेहतर बाइफेशियलिटी, विविध जलवायु स्थितियों में मजबूत प्रदर्शन, और यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर LCOE प्रदान करते हैं.
यह साझेदारी भारत में घरेलू और उच्च-तकनीकी सोलर मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती प्राथमिकता को रेखांकित करती है. दोनों कंपनियां देश के 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
350 MWp की यह क्षमता जब ग्राउंड पर स्थापित होगी, तो यह प्रति वर्ष लगभग 4,07,000 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी लाएगी (CEA CO₂ Baseline Database v20.0, Dec 2024 के अनुसार).
यह सहयोग भारत के अगले दशक के स्वच्छ ऊर्जा विकास में स्वदेशी नवाचार और मैन्युफैक्चरिंग स्केल की अहम भूमिका को दर्शाता है.
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