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अमेरिका ने जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ से राहत दी, पेटेंट दवाओं पर 100% तक शुल्क संभव

यह कदम घरेलू फार्मास्यूटिकल क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि भविष्य में टैरिफ नीतियों पर लचीलापन बनाए रखता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

संयुक्त राज्य अमेरिका ने फिलहाल जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ लागू नहीं करने का फैसला किया है, जबकि पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाए जाने की संभावना जताई गई है. यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है, जोकि अमेरिकी वाणिज्य सचिव की समीक्षा के आधार पर Trade Expansion Act, Section 232 के तहत की गई है.

पेटेंट दवाओं पर निर्भरता बढ़ने की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि वाणिज्य सचिव की रिपोर्ट के अनुसार, फार्मास्यूटिकल उत्पादों के आयात का पैमाना और स्वरूप राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. रिपोर्ट में विदेशी उत्पादन पर बढ़ती निर्भरता, विशेषकर उच्च मूल्य वाली पेटेंट दवाओं और उनके प्रमुख घटकों में, को उजागर किया गया है.

रिपोर्ट में FDA के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि 2025 तक अमेरिका में उपभोग की जाने वाली पेटेंट फार्मास्यूटिकल उत्पादों का लगभग 53 प्रतिशत विदेशी उत्पादन से आएगा. सक्रिय फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) के मामले में स्थिति और अधिक गंभीर है, जहां केवल लगभग 15 प्रतिशत पेटेंट APIs घरेलू स्तर पर उत्पादित होते हैं.

जेनेरिक दवाओं पर कोई तत्काल प्रतिबंध नहीं
इन चिंताओं के बावजूद, ट्रंप ने कहा कि प्रशासन ने इस चरण में जेनेरिक दवाओं और उनके घटकों, जिनमें बायोसिमिलर्स भी शामिल हैं, के आयात को समायोजित न करने का निर्णय लिया है. यह रणनीतिक API रिजर्व के लिए आपूर्ति को भी कवर करता है. हालांकि, स्थिति में बदलाव होने पर एक साल के भीतर इस नीति की समीक्षा की जा सकती है.

पेटेंट और जेनेरिक दवाओं के बीच भेदभावपूर्ण नीति
सरकार का दृष्टिकोण जेनेरिक और पेटेंट दवाओं में अंतर दर्शाता है. जबकि प्रशासन उच्च मूल्य वाली, नवाचारी दवाओं के आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है, जेनेरिक दवाओं पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से बचा गया है ताकि दवाओं की पहुंच और सस्ती कीमत सुनिश्चित हो सके.

भारत के फार्मास्यूटिकल निर्यातकों के लिए अवसर
अमेरिका भारत के प्रमुख फार्मा निर्यातकों जैसे Dr Reddy's Laboratories, Lupin, Sun Pharma, Glenmark Pharmaceuticals और Zydus Lifesciences के लिए एक बड़ा बाजार बना हुआ है, जहां भारत हर साल लगभग 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की दवाएं निर्यात करता है.

भविष्य की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय समझौते
घोषणा में कहा गया कि “मोस्ट फैवर्ड नेशन” मूल्य निर्धारण वाली पेटेंट दवाओं पर 20 जनवरी, 2029 तक शून्य टैरिफ रह सकता है. इसके अलावा, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और प्रस्तावित रूप से यूनाइटेड किंगडम के साथ व्यापार समझौतों में फार्मास्यूटिकल प्रतिबद्धताओं को लागू करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया.

 


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