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क्या फिर से आने वाली है मंदी, आखिर क्यों पूछा जा रहा है ये सवाल?

अमेरिका में मंदी की आशंका व्यक्त की जा रही है. यदि ऐसा होता है तो भारत सहित पूरी दुनिया में इसका असर देखने को मिल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे (Warren Buffett) की हर चाल पर दुनियाभर की निगाह होती है. जब वॉरेन कोई फैसला लेते हैं, तो लोग इसके पीछे की वजह तलाशने लगते हैं. यही वजह है कि वॉरेन बफे की फिलहाल निवेश से दूरी ने कई आशंकाओं को जन्म दिया है. यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या अमेरिका में मंदी आने वाली है?  दरअसल, वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) के पास रखा कैश रिजर्व जून तिमाही में बढ़ गया है. कंपनी का कैश रिजर्व अब उसके कुल एसेट्स का करीब 25 प्रतिशत हो गया है. 

इतनी घटाई हिस्सेदारी 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2005 के बाद यह पहला मौका है, जब कंपनी ने अपना 25% एसेट्स कैश में रखा हुआ है. बर्कशायर हैथवे ने हाल ही में Apple और बैंक ऑफ अमेरिका में अपने शेयरे बेचे हैं. इससे कंपनी के पास रखा कुल कैश और कैश इक्विवैलेंट्स 276.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि इक्विटी मार्केट के हाई वैल्यूएशन के मद्देनजर वॉरेन बफे फिलहाल निवेश करने से बच रहे हैं. बता दें कि बर्कशायर ने 3 अगस्त को एपल इंक में अपनी हिस्सेदारी लगभग 50% तक कम के थी. इसी तरह, जुलाई के दौरान उसने बैंक ऑफ अमेरिका में भी अपनी हिस्सेदारी 8.8% घटाई थी.

खरीदने की जल्दी नहीं
मई में बर्कशायर हैथवे की सालाना जनरल मीटिंग (AGM) के दौरान वॉरेन बफे ने कहा था कि वह अधिक इक्विटी खरीदने की जल्दबाजी में नहीं हैं. जब हमें कोई ऐसा शेयर दिखेगा जिसमें कम जोखिम और ज्यादा रिटर्न होगा तो उसे खरीद लेंगे. इससे कहीं न कहीं निवेशकों में यह आशंका घर कर गई है कि बाजार में कुछ बड़ा होने वाला है. इसलिए बफे सेफ गेम खेल रहे हैं. वहीं, इक्विटी मार्केट पर नजर रखने वाली फर्म कोबेसी लेटर ने सोशल मीडिया पर पूछा कि क्या बफे को मंदी की आशंका है? यह सवाल इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि   बर्कशायर का कैश रिजर्व  पिछले 2 सालों में करीब दो गुना बढ़ चुका है. कैश होल्डिंग में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका में मंदी आने की आशंका जताई जा रही है

यह भी हो सकती है वजह
वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि वॉरेन बफे द्वारा लगातार शेयर बेचकर पैसा निकालने का एक कारण यह भी हो सकता है कि उन्हें भविष्य में कॉरपोरेट टैक्स में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है. अमेरिका में अगले कुछ महीनों में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. ऐसे में नई सरकार के गठन के बाद नीतियों में बदलाव संभव है. बफे ने भी मई में कहा था कि नई सरकार टैक्स नीतियों में बदलाव कर सकती है. गौरतलब है कि  बर्कशायर हैथवे का शेयर दुनिया में सबसे महंगा है. कंपनी मार्केट कैप इस समय 944.60 अरब डॉलर है और यह दुनिया की आठवीं सबसे मूल्यवान कंपनी है.


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