होम / बिजनेस / अमेरिका ने भारत समेत 5 देशों को दी बड़ी राहत, रूस से तेल आयात पर 500% की जगह अब 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिका ने भारत समेत 5 देशों को दी बड़ी राहत, रूस से तेल आयात पर 500% की जगह अब 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
रूस से कच्चा तेल आयात करने वाले देशों के लिए अमेरिका ने अपने प्रतिबंध प्रस्ताव में बड़ी नरमी दिखाई है. अमेरिकी सीनेट में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के संशोधित मसौदे में भारत समेत पांच प्रमुख खरीदार देशों पर प्रस्तावित टैरिफ 500% से घटाकर अधिकतम 100% करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही, कुछ देशों को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान भी जोड़ा गया है.
संशोधित बिल में क्या बदला?
अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित टैरिफ की दर और उसके दायरे में किया गया है. पहले रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले सभी देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. अब इसे घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है और यह केवल रूस से तेल एवं गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. भारत भी इस सूची में शामिल है.
किन देशों पर लागू होगा नया टैरिफ?
अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ केवल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लागू होगा. इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में टैरिफ से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है, हालांकि इसका दायरा सीमित होगा.
किन देशों को मिल सकती है राहत?
संशोधित बिल में उन देशों के लिए राहत का भी प्रावधान है, जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं. इस व्यवस्था का लाभ जापान, फ्रांस, बेल्जियम और हंगरी जैसे देशों को मिल सकता है.
रूस पर और कड़े होंगे प्रतिबंध
टैरिफ के अलावा, विधेयक में रूस की अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है. इनमें ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा रूस के 'शैडो फ्लीट', केंद्रीय बैंक और यामल LNG व आर्कटिक LNG जैसी प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रस्ताव है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर इन प्रतिबंधों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है.
पहले क्या था प्रस्ताव?
अप्रैल 2025 में पेश Sanctioning Russia Act 2025 के मूल मसौदे में रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से आने वाले आयात पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद इन देशों ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पिछले कुछ वर्षों में रूस उसके प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है. ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ को 500% से घटाकर 100% करना भारत के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह अभी केवल संशोधित विधेयक का प्रस्ताव है और इसके कानून बनने की प्रक्रिया अभी बाकी है.
टैग्स