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AIF निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, पहली बार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा

जून 2026 तक AIF में कुल निवेश ₹7.1 लाख करोड़ पहुंचा, सालाना आधार पर निवेश प्रतिबद्धता 23.6% बढ़ी; रियल एस्टेट में पहली बार गिरावट

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) में निवेश का आंकड़ा पहली बार 7 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक AIF में कुल निवेश बढ़कर 7.1 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, इस श्रेणी के फंड्स के लिए कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़कर 17.53 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो मार्च 2026 के अंत में 16.94 लाख करोड़ रुपये थी. यानी तीन महीने में प्रतिबद्धता में करीब 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

सालाना आधार पर देखें तो जून 2025 की तुलना में AIF में निवेश प्रतिबद्धता करीब 23.6 फीसदी बढ़ी है. इस दौरान AIF के जरिए जुटाया गया कुल फंड भी बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गया. आंकड़े बताते हैं कि वैकल्पिक निवेश का यह सेगमेंट लगातार विस्तार कर रहा है. 

क्या होता है AIF

AIF ऐसे निवेश फंड होते हैं जो आमतौर पर पारंपरिक म्यूचुअल फंड या बैंक FD से अलग तरह की संपत्तियों और कंपनियों में निवेश करते हैं. इनमें बड़े निवेशक अपना पैसा लगाते हैं और पेशेवर फंड मैनेजर उस पैसे को अलग-अलग अवसरों में निवेश करते हैं.  AIF के जरिए  स्टार्टअप और अनलिस्टेड कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्ज/डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश किया जाता है. वहीं, कुछ मामलों में शेयर और अन्य वैकल्पिक जगह भी निवेश होता है. 

चार साल में तीन गुना से ज्यादा हुई प्रतिबद्धता

AIF में निवेश प्रतिबद्धता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है. जून 2021 में यह 4.87 लाख करोड़ रुपये थी, जो जून 2022 में बढ़कर 6.94 लाख करोड़ रुपये हो गई. जून 2023 में यह आंकड़ा 8.45 लाख करोड़ रुपये और जून 2024 में 11.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.

इसके बाद भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा. मार्च 2026 तक AIF में निवेश प्रतिबद्धता 16.94 लाख करोड़ रुपये थी, जो जून 2026 तक बढ़कर 17.53 लाख करोड़ रुपये हो गई.

इस तरह चार साल की अवधि में AIF में निवेश के लिए की गई प्रतिबद्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. यह ऐसे समय में हो रहा है जब वैकल्पिक निवेश उत्पादों के प्रति बड़े और संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है.

रियल एस्टेट में पहली बार निवेश घटा

AIF के आंकड़ों में एक अहम बदलाव रियल एस्टेट क्षेत्र में देखने को मिला है. जून 2026 तक रियल एस्टेट में कुल निवेश 87,969 करोड़ रुपये रहा, जबकि मार्च 2026 में यह करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये था. यानी इस क्षेत्र में तिमाही आधार पर निवेश में गिरावट दर्ज की गई.

हालांकि, निवेश के मामले में रियल एस्टेट अब भी AIF के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है. वहीं वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), बैंकों, फार्मा और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है. इन सेक्टरों में बढ़ता निवेश AIF के पोर्टफोलियो के धीरे-धीरे ज्यादा विविध होने का संकेत देता है.

प्रतिबद्धता और निवेश में क्या अंतर है?

AIF के आंकड़ों को समझने के लिए ‘कमिटमेंट’ और ‘इन्वेस्टमेंट’ के बीच अंतर समझना जरूरी है. निवेशक जब किसी AIF में पैसा लगाने की प्रतिबद्धता जताते हैं, तो पूरी रकम आमतौर पर एक साथ फंड में नहीं आती. फंड मैनेजर जरूरत और निवेश के अवसर के अनुसार इसे अलग-अलग किस्तों में बुलाते हैं.

यही वजह है कि कुल निवेश प्रतिबद्धता का आंकड़ा जुटाए गए फंड और वास्तविक निवेश से काफी अधिक रहता है. जैसे-जैसे फंड मैनेजर निवेश के लिए प्रतिबद्ध रकम का इस्तेमाल करते हैं, उसका असर जुटाए गए फंड और वास्तविक निवेश के आंकड़ों में दिखाई देता है.

SEBI के सुधारों से भी मिला सहारा

पिछले कुछ वर्षों में बाजार नियामक SEBI ने AIF के लिए फंड जुटाने और उनके संचालन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं. नियामक का फोकस इस सेगमेंट के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने और निवेश प्रक्रिया को आसान करने पर रहा है.

SEBI निवेशकों को AIF जैसे वैकल्पिक निवेश उत्पादों से जोड़ने के लिए एक्रिडिटेड इन्वेस्टर फ्रेमवर्क की भी समीक्षा करने पर विचार कर रहा है. ऐसे नियामकीय बदलावों से इस सेगमेंट में निवेशकों की भागीदारी और फंड मैनेजरों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.

कुल मिलाकर, जून 2026 तक के आंकड़े AIF बाजार के लगातार विस्तार की तस्वीर दिखाते हैं. ₹7.1 लाख करोड़ का वास्तविक निवेश पहली बार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंचना और ₹17.53 लाख करोड़ की निवेश प्रतिबद्धता यह बताती है कि वैकल्पिक निवेश फंड भारतीय निवेश बाजार में लगातार बड़ा स्थान बना रहे हैं.
 


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