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जेन स्ट्रीट मामले के बाद SEBI ने HFT फर्मों पर कसा शिकंजा, नए और सख्त नियम लाने की तैयारी
SEBI अब डेरिवेटिव और कैश बाजार में संभावित हेरफेर की पहचान के लिए अपने निगरानी तंत्र को मजबूत कर रहा है, साथ ही ट्रेडिंग नियमों को भी लगातार सख्त बनाया जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अब हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्मों की गतिविधियों पर पहले से कहीं ज्यादा कड़ी नजर रख रहा है. डेरिवेटिव और कैश मार्केट में हेरफेर को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है. दरअसल, SEBI और देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज अब जेन स्ट्रीट से जुड़े मामले के बाद वैश्विक हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और क्वांट फर्मों की ट्रेडिंग रणनीतियों की व्यापक जांच में जुट गए हैं. हालांकि जेन स्ट्रीट के खिलाफ तत्काल किसी बड़े स्तर के नियम उल्लंघन के संकेत नहीं मिले हैं, फिर भी सिटाडेल सिक्योरिटीज, ऑप्टिवर, मिलेनियम और IMC ट्रेडिंग जैसी फर्मों के भारत में विस्तार को देखते हुए SEBI अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है.
गोपनीय रणनीतियों पर भी रखी जाएगी नजर
जानकारों के अनुसार, SEBI और एक्सचेंज अब वायदा, विकल्प और कैश सेगमेंट में हेरफेर करने वाले पैटर्न की पहचान के लिए निगरानी तंत्र को उन्नत बना रहे हैं. इससे इन फर्मों की ट्रेडिंग रणनीतियों पर नजर रखना आसान होगा, भले ही वे एक्सचेंजों के साथ अपनी रणनीति साझा न करें.
जेन स्ट्रीट पर 4,840 करोड़ का जब्ती आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अगस्त 2024 में जेन स्ट्रीट की ट्रेडिंग गतिविधियों में संदेहास्पद व्यवहार पाया गया, जिसने निगरानी प्रणाली की कुछ कमियों को उजागर किया. कई महीनों की गहन जांच के बाद SEBI ने अमेरिकी फर्म पर 4,840 करोड़ रुपये की जब्ती का आदेश जारी किया. यह मामला दिखाता है कि कितनी भी परिष्कृत फर्में क्यों न हों, वे भारतीय कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं.
इंट्राडे इंडेक्स हेरफेर और एक्सटेंडेड मार्किंग क्लोज
SEBI की रिपोर्ट के अनुसार, जेन स्ट्रीट ने ‘इंट्राडे इंडेक्स हेरफेर’ और ‘एक्सटेंडेड मार्किंग क्लोज’ जैसी रणनीतियों का उपयोग किया.
-पहली रणनीति में, जेन स्ट्रीट ने बैंक निफ्टी इंडेक्स के भारी वज़नी शेयरों जैसे HDFC बैंक और ICICI बैंक को आक्रामक तरीके से खरीदा और इसके समानांतर निफ्टी बैंक ऑप्शंस में शॉर्ट पोजिशन ली. इससे उन्हें कैश और फ्यूचर्स पोजिशन बेचकर मुनाफा हुआ.
-दूसरी रणनीति में, ट्रेडिंग के अंतिम पलों में बड़े सौदों के माध्यम से इंडेक्स क्लोजिंग को ऑप्शंस पोजिशन के पक्ष में प्रभावित किया गया.
आगे और भी कड़े होंगे नियम
SEBI ने हाल के महीनों में डेरिवेटिव सेगमेंट में कई नए नियम लागू किए हैं:
- ओपन इंटरेस्ट के लिए नया ‘डेल्टा’ कैलकुलेशन
- संशोधित मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट
- दिन में चार बार इंट्राडे निगरानी
इसके अलावा, भविष्य में संभावित सुधारों में पाक्षिक निपटान में बदलाव और F&O सेगमेंट में सट्टा ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के उपाय शामिल हो सकते हैं.
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