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हिंडनबर्ग के बाद कांग्रेस के कठघरे में SEBI चीफ, लगाए कई गंभीर आरोप
कांग्रेस ने सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर कई गंभीर आरोप लगाये हैं. पार्टी ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी से भी सवाल पूछे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हिंडनबर्ग के बाद कांग्रेस ने सेबी प्रमुख को कठघरे में खड़ा किया है. कांग्रेस पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमेन पवन खेड़ा ने आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कुछ बड़े दावे किए. उन्होंने कहा कि देश में शतरंज का खेल चल रहा है, लेकिन खिलाड़ी कौन है इस पर हम फिलहाल निर्णायक फैसले पर नहीं पहुंचे हैं. कई अलग-अलग मोहरे हैं. उनमें से एक मोहरे के विषय पर हम आज बात कर रहे हैं और उनका नाम है माधबी पुरी बुच.
नियमों का सीधा उल्लंघन
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि माधबी पुरी बुच, SEBI की मेंबर थीं, उसके बाद 2 मार्च 2022 को चेयरपर्सन बनीं. सेबी शेयर मार्केट की नियामक संस्था है और उसके चेयरपर्सन की नियुक्ति प्रधानमंत्री और गृहमंत्री करते हैं. उन्होंने पूछा कि सेबी की चैयरमैन रहते हुए बुच ICICI बैंक से कैसे और क्यों तनख्वाह ले रहीं थीं. उन्होंने 2017 से 2024 तक 16.80 करोड़ लिए. कांग्रेस लीडर ने आगे कहा कि सेबी की अध्यक्ष ने पहला गैर कानूनी काम 2017 से 2019 तक आईसीआईसीआई बैंक से तनख्वाह लेकर किया, जबकि वह सेबी की मेंबर थीं. ये सीधे-सीधे सेबी के सेक्शन 54 का उल्लंघन है.
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— Congress (@INCIndia) September 2, 2024
शर्म है, तो इस्तीफा दें
कांग्रेस नेता ने सेबी प्रमुख से कहा कि यदि थोड़ी शर्म है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन्हें सेबी से तनख्वाह भी मिलती थी, आईसीआईसीआई में अचानक 422% तनख्वाह इनकी बढ़ गई, मतलब कई जगह से सैलरी ले रही हैं. खेड़ा ने दावा किया कि SEBI चीफ एक साथ तीन जगहों से सैलरी ले रही थीं. वो ICICI बैंक, ICICI बैंक प्रोडेंशियल और SEBI से एक साथ सैलरी ले रही थीं. यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि बुच आईसीआईसीआई से 16 करोड़ और सेबी से 3 करोड़ से ज्यादा की सैलरी ले चुकी हैं. इस दौरान आईसीआईसीआई के कई केस में सेबी जांच कर रहा है और जजमेंट दे रहा है, आखिर ये शतरंज के खिलाड़ी हैं कौन?
पीएम पर भी दागे सवाल
पवन खेड़ा ने कहा कि सेबी प्रमुख आईसीआईसीआई केस में जजमेंट देती हैं उसी से सैलरी लेती हैं, सवाल पीएम से है और अमित शाह से भी कि आप जब रेगुलेटरी बॉडी के हेड की नियुक्ति करते हैं तो उसका क्राइटेरिया क्या होता है? क्या ये तथ्य आपके सामने आए या उसके बाद आए और आपने नजरंदाज कर दिया, और अगर नहीं आए तो आप कैसी सरकार चला रहे हैं? खेडा ने पूछा कि क्या पीएम जानते थे कि वो आईसीआईसीआई से सैलरी ले रही हैं जबकि वो सेबी की मेंबर बन चुकी हैं. क्या पीएम को पता है कि आईसीआईसीआई से सैलरी लेने वाली मैडम जहां मेंबर हैं, आईसीआईसीआई के केस वही सुने जाते हैं और वहीं फैसले होते हैं. सेबी की मेंबर या अध्यक्ष को आईसीआईसीआई छोड़ने के बाद भी लाभ क्यों मिलते रहे, टीडीएस भी मिलता रहा?.
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