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7 साल बाद लौटा ईरानी तेल, भारत के ऊर्जा बाजार में नई हलचल

ईरानी तेल की भारत में वापसी सिर्फ एक व्यापारिक घटना नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति का अहम संकेत है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

करीब सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत में ईरानी कच्चे तेल की वापसी हो गई है. अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के चलते ईरान से तेल लेकर आए सुपरटैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं. यह घटनाक्रम न केवल ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और भारत की रणनीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है.

भारत में ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप लगभग सात साल बाद पहुंची है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दो बड़े सुपरटैंकर देश के पूर्वी और पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर लंगर डाल चुके हैं. इनमें से एक टैंकर ‘फेलिसिटी’ गुजरात के सिक्का तट के पास रुका, जिसमें करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था. वहीं दूसरा टैंकर ‘जया’ ओडिशा के पारादीप तट पर पहुंचा, जो लगभग समान मात्रा में तेल लेकर आया है.

अमेरिकी छूट से खुला रास्ता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आपूर्ति अमेरिका द्वारा दिए गए सीमित समय के सैंक्शन्स वेवर के कारण संभव हो सकी. इस छूट के तहत उन तेल खेपों की बिक्री की अनुमति दी गई, जो पहले से समुद्र में थीं. हालांकि, हाल ही में शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने फिर सख्ती दिखाते हुए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है. ऐसे में यह छूट अस्थायी ही मानी जा रही है.

किन बंदरगाहों पर पहुंचा तेल

ओडिशा का पारादीप पोर्ट मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन संचालित करता है, जिसने इस छूट के तहत कम से कम एक खेप खरीदने की पुष्टि की है. वहीं गुजरात का सिक्का बंदरगाह रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के लिए एक प्रमुख हब है, जहां कच्चे तेल का प्रबंधन किया जाता है. इससे पहले ‘पिंग शुन’ नामक एक टैंकर भारत आने वाला था, लेकिन भुगतान संबंधी दिक्कतों के चलते उसे चीन की ओर मोड़ दिया गया.

2019 में क्यों बंद हुआ था आयात

भारत, ईरान का एक बड़ा तेल खरीदार रहा है. बेहतर गुणवत्ता और अनुकूल व्यापार शर्तों के कारण भारत ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता था, लेकिन 2018 में अमेरिकी प्रतिबंध सख्त होने के बाद मई 2019 से यह आयात पूरी तरह बंद हो गया. इसके बाद भारत ने मध्य-पूर्व, अमेरिका और अन्य देशों से तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कीं.

भारत के लिए कितना अहम था ईरानी तेल

अपने चरम पर भारत के कुल तेल आयात में ईरानी तेल की हिस्सेदारी 11.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. वर्ष 2018 में भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल तेल ईरान से खरीदता था. हालांकि 2019 में यह घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और बाद में पूरी तरह बंद हो गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिबंधों में ढील जारी रहती है, तो भारत फिर से ईरानी तेल का बड़ा खरीदार बन सकता है. इससे देश को सस्ता कच्चा तेल मिल सकता है और ऊर्जा लागत पर दबाव कम होगा.

फिलहाल समुद्र में मौजूद लगभग 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल में से करीब 51 मिलियन बैरल भारत के लिए उपलब्ध हो सकता है. हालांकि, अंतिम निर्णय वैश्विक राजनीति और अमेरिकी नीति पर निर्भर करेगा.

 


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