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Whirlpool India में हिस्सेदारी खरीदेगी एडवेंट इंटरनेशनल, ₹9,600 करोड़ में होगी डील

अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो यह भारत के घरेलू उपकरण उद्योग के लिए बड़ा बदलाव साबित होगा. एडवेंट के निवेश से व्हर्लपूल इंडिया को नई दिशा मिल सकती है, जबकि मूल कंपनी के लिए यह वैश्विक पुनर्गठन का अहम कदम होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनी व्हर्लपूल इंडिया (Whirlpool India) अब एक बड़े सौदे की ओर बढ़ रही है. अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल (Advent International) इसे खरीदने के करीब है. यह डील लगभग 1 अरब डॉलर (9,682 करोड़ रुपये) की हो सकती है और इस महीने के अंत तक इसकी घोषणा हो सकती है.

भारत में व्हर्लपूल का सौदा

भारत के होम अप्लायंस सेक्टर से बड़ी खबर है कि व्हर्लपूल इंडिया का नियंत्रण बदल सकता है. एडवेंट इंटरनेशनल कंपनी में 31% हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है. SEBI के नियमों के मुताबिक, इतनी हिस्सेदारी खरीदने के बाद एडवेंट को 26% और शेयरों के लिए ओपन ऑफर देना होगा. अगर यह ऑफर सफल रहा तो एडवेंट के पास 57% हिस्सेदारी होगी और व्हर्लपूल कॉर्पोरेशन केवल अल्पसंख्यक हिस्सेदार बनकर रह जाएगी.

क्यों हिस्सेदारी बेच रही है व्हर्लपूल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार व्हर्लपूल की मूल कंपनी व्हर्लपूल कॉर्पोरेशन (Michigan, USA) को पिछले कुछ वर्षों से नुकसान हो रहा है. 2022 के अंत में कंपनी को 1.5 अरब डॉलर का घाटा हुआ था. इसके बाद कंपनी ने अपनी रणनीति बदली और अब वह अमेरिका में अपने कारोबार और छोटे लेकिन ज्यादा मुनाफे वाले उत्पादों जैसे ब्लेंडर और कॉफी मेकर पर ध्यान दे रही है. भारत में हिस्सेदारी घटाना इसी योजना का हिस्सा है. फरवरी 2024 में कंपनी ने 24.7% हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों को बेची थी और अब इसे घटाकर 20% करने की तैयारी है.

एडवेंट के लिए बड़ी डील

इस सौदे में पहले बेन कैपिटल और EQT भी रेस में थे, लेकिन अब केवल एडवेंट बचा है. दोनों कंपनियों के बीच नवंबर के अंत तक *विशेष बातचीत (exclusive negotiation)* चल रही है. एडवेंट भारत के अप्लायंस सेक्टर में पहले से सक्रिय है. उसने क्रॉम्पटन ग्रीव्ज कंज्यूमर बिजनेस और यूरेका फोर्ब्स जैसी कंपनियों में निवेश किया है.

व्हर्लपूल इंडिया के नए समझौते

व्हर्लपूल इंडिया ने हाल ही में अपनी अमेरिकी पैरेंट कंपनी के साथ कुछ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं. इनमें 30 सालों के लिए ‘व्हर्लपूल’ ब्रांड का उपयोग करने का लाइसेंस और 10 सालों के लिए टेक्नोलॉजी लाइसेंस एग्रीमेंट शामिल हैं. इन समझौतों से भारत में ब्रांड व्हर्लपूल की निरंतरता बनी रहेगी, भले ही पैरेंट कंपनी अपनी बाकी हिस्सेदारी भी बेच दे. यही वजह है कि एडवेंट इस डील में ज्यादा रुचि दिखा रहा है.

भारत में व्हर्लपूल का प्रदर्शन

व्हर्लपूल भारत में 1980 के दशक के अंत में आई थी. यह शुरुआती बहुराष्ट्रीय ब्रांडों में से एक रही है. फिर भी, एलजी, सैमसंग और वोल्टास जैसे ब्रांडों के मुकाबले इसकी बाजार हिस्सेदारी सीमित रही है. कंपनी प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत है, लेकिन आम बाजार में इसकी पकड़ उतनी नहीं है.


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