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ऑस्ट्रेलिया में अडानी का बड़ा कदम: 14.38 करोड़ के शेयरों के बदले खरीदा कोल टर्मिनल
गौतम अडानी के नेतृत्व में अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने एक और अंतरराष्ट्रीय कदम बढ़ाते हुए ऑस्ट्रेलिया में नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल (NQXT) का अधिग्रहण किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
एशिया के दूसरे सबसे अमीर बिजनेसमैन गौतम अडानी के नेतृत्व वाली अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ा अधिग्रहण करने की घोषणा की है. कंपनी नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल (NQXT) को 2.4 अरब डॉलर के सौदे में खरीदने जा रही है. इस सौदे से अडानी पोर्ट्स की सालाना संचालन क्षमता में 5 करोड़ टन की बढ़ोतरी होगी, जिससे कंपनी 2029-30 तक अपनी कुल क्षमता को दोगुना करने में सक्षम हो सकेगी. आइए जानते हैं अडानी की पूरी प्लानिंग क्या है?
बिना नकद होगा सौदा, शेयरों के बदले अधिग्रहण
APSEZ ने बताया कि यह अधिग्रहण नकद भुगतान के बजाय शेयरों के रूप में होगा. कंपनी, कार्माइकल रेल एंड पोर्ट सिंगापुर होल्डिंग्स पीटीई लिमिटेड (CRPSHPL) को अपनी कंपनी के 14.38 करोड़ नए शेयर जारी करेगी. यह सौदा 3.975 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर) के उद्यम मूल्य पर आधारित है.
कंपनी की क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
APSEZ ने पहली बार 2011 में एबॉट पॉइंट स्थित इस टर्मिनल को 2 अरब डॉलर में खरीदा था, जिसे 2013 में अडानी परिवार ने समान कीमत पर अपने नियंत्रण में ले लिया. अब कंपनी इसे दोबारा खरीद रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर अपने व्यापार का विस्तार कर सके. APSEZ ने बताया कि इस अधिग्रहण से उसकी कुल संचालन क्षमता 50 करोड़ टन से बढ़कर 55 करोड़ टन हो जाएगी. कंपनी का लक्ष्य 2029-30 तक एक अरब टन की वार्षिक क्षमता हासिल करना है, और यह सौदा उस दिशा में एक अहम कदम है.
विदेशों में चौथा बड़ा अधिग्रहण
यह सौदा अडानी पोर्ट्स का पिछले दो वर्षों में चौथा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण होगा. इस समय कंपनी के पास कुल 19 बंदरगाह और टर्मिनल हैं, जिनमें 15 भारत में और 4 विदेशों में हैं. ऑस्ट्रेलिया के अलावा, कंपनी इजराइल, तंजानिया और श्रीलंका में भी कार्यरत है. APSEZ का मानना है कि यह अधिग्रहण कंपनी को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बना देगा. अडानी समूह का लक्ष्य है कि वह दुनिया की अग्रणी बंदरगाह कंपनियों में से एक बने, और यह डील उस लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है. इस प्रकार के वैश्विक अधिग्रहण न केवल अडानी समूह की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति और व्यापारिक उपस्थिति को भी विश्व स्तर पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होते हैं.
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