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अडानी भरेंगे सरकार का खजाना! केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट में रेवेन्यू का 42% हिस्सा देने को तैयार, जानें पूरी डिटेल
यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. दरअसल, केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग से गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ तक एक अत्याधुनिक रोपवे परियोजना को मंजूरी दे दी है. यह प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में बनाया जाएगा, जिससे सरकार को बिना कोई निवेश किए मुनाफा होगा. इस मेगा प्रोजेक्ट में देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी ने भी दिलचस्पी दिखाई है.
रोपवे विकसित करने के लिए लगाई बोली
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने भी रुचि दिखाई है. कंपनी ने इस रोपवे को विकसित करने के लिए बोली लगाई है और राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स प्रबंधन लिमिटेड (NHLML) के साथ राजस्व का 42% हिस्सा साझा करने की पेशकश की है. NHLML इस तरह की परियोजनाओं को देशभर में लागू करने वाली प्रमुख सरकारी एजेंसी है.
चार में से तीन कंपनियों ने दी राजस्व साझा करने की पेशकश
इस परियोजना के लिए कुल चार कंपनियों ने बोली लगाई, जिनमें से तीन ने राजस्व साझा करने का प्रस्ताव दिया. NHLML ने इससे पहले दो बार टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी थी, लेकिन जरूरी सुधारों के बाद हाल में फिर से नई बोलियां मंगाई गईं. अब यह प्रोजेक्ट 4,081 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा और इसे अगले छह साल में पूरा करने का लक्ष्य है, जिस कंपनी को ठेका मिलेगा, उसे 35 वर्षों तक रोपवे का संचालन, रखरखाव और किराया वसूली का अधिकार मिलेगा.
सिर्फ 36 मिनट में तय होगा 13 किमी का सफर
फिलहाल गौरीकुंड से केदारनाथ तक की दूरी 13 किलोमीटर है, जिसे श्रद्धालुओं को पैदल तय करने में 8 से 9 घंटे लगते हैं, लेकिन इस रोपवे के बन जाने से यह सफर सिर्फ 36 मिनट में पूरा किया जा सकेगा. इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा होगी बल्कि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस रोपवे के जरिए रोजाना 18,000 यात्री यात्रा कर सकेंगे, यानी साल भर में लगभग 32 लाख श्रद्धालु इसका लाभ उठा पाएंगे. चूंकि केदारनाथ मंदिर साल में लगभग छह महीने ही खुला रहता है, इसलिए इस प्रोजेक्ट से इन महीनों में तीर्थयात्रियों की संख्या और सुविधा दोनों में भारी इजाफा होगा.
सरकार को बिना निवेश के होगा फायदा
इन परियोजनाओं को PPP मोड में विकसित किया जा रहा है, जिससे सरकार को किसी तरह की सीधी वित्तीय भागीदारी नहीं करनी पड़ रही है. इसके बावजूद, उसे राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलेगा. साथ ही, तीर्थयात्रियों को समय और श्रम की बचत के साथ-साथ अधिक सुरक्षित और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा.
3S तकनीक से बनेगा रोपवे, हर गोंडोला में 36 यात्री
यह रोपवे आधुनिक Tri-Cable Detachable Gondola (3S) तकनीक पर आधारित होगा. इसमें तीन केबल वाली व्यवस्था होगी, जिससे चलने वाले गोंडोलों को आसानी से जोड़ा और अलग किया जा सकेगा. हर गोंडोला में 36 यात्री सफर कर सकेंगे. इससे यात्रा सुरक्षित और आरामदायक बनेगी.
हेमकुंड साहिब रोपवे भी पाइपलाइन में
सरकार द्वारा अन्य धार्मिक स्थलों को जोड़ने की योजनाएं भी बनाई जा रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब के लिए 12.4 किमी लंबे रोपवे की योजना पर भी काम चल रहा है. इसकी अनुमानित लागत 2,730 करोड़ रुपये है और इससे हर दिन लगभग 11,000 श्रद्धालु यात्रा कर पाएंगे.
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