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हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद बाद अडानी समूह ने उठाया ये बड़ा कदम
अडानी समूह को उम्मीद है कि वो तीन से चार महीने के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा करने की उम्मीद है. इस प्रक्रिया में ज्यादातर मौजूदा उधारदाताओं के भाग लेने की उम्मीद है.
ललित नारायण कांडपाल 2 years ago
हिंडनबर्ग मामले के सामने आने के बाद अडानी समूह को कितना नुकसान हुआ ये बात सभी लोग जानते हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि अपने लोन को रिफाइनेंस करने के लिए उधारदातों के साथ बातचीत कर रहा है. अडानी समूह वैश्विक बैंकों सहित उधारदाताओं के साथ बातचीत कर रहा है, क्योंकि पिछले साल उसने अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए ली गई 3.8 बिलियन डॉलर की राशि ली थी जिसे अब वो रिफाइनेंस करना चाहता है. समूह को विश्वास है कि वो इस प्रोसेस को तीन से चार महीने में पूरा कर लेगा.
लंबी अवधि में बदलना चाहता है अडानी समूह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कारोबारी गौतम अडानी जोकि पोर्ट से लेकर पावर तक के समूह के मालिक हैं वो अपने मूल कर्ज को अब लंबे समय के लिए मैच्योरिटी पीरियड में बदलना चाहते हैं. उन्होंने इस बारे में बैंकों से बात करना भी शुरू कर दिया है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि जनवरी में जिस तरह से हिंडनबर्ग के कई आरोप सामने आए थे उसके बाद क्या वैश्विक क्रेडिट लाइन कंपनी उनके लिए फिर से तैयार होंगी या नहीं. हालांकि अडानी समूह ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था हालांकि उन्होंने हिंडनबर्ग के कई सवालों का जवाब दिया था. इस प्रक्रिया में ज्यादातर मौजूदा उधारदाताओं के भाग लेने की उम्मीद है. मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि अडानी के एक प्रवक्ता ने सवाल का जवाब तुरंत नहीं दिया.
कौन-कौन से बैंक हो सकते हैं इसमें शामिल
अडानी समूह के अपने कर्ज को रिफाइनेंस कराने की इस प्रक्रिया में कई विदेशी बैंकों के शामिल होने की उम्मीद है. इनमें बार्कलेज पीएलसी, डॉयचे बैंक एजी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी और मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप इंक जैसे बैंक पुनर्वित्त सौदे में भाग लेने के लिए बातचीत हो रही है. जबकि कुछ ऋणदाता व्यवस्था के अनुमोदन के लिए अपनी संबंधित अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट टीमों के पास गए हैं. वहीं दूसरी ओर बार्कलेज, डॉयचे, एमयूएफजी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. सौदा अभी तक तय नहीं हुआ है और आगे नहीं बढ़ा है. अगर ये डील होती है तो जनवरी में हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद समूह का ये पहला बड़ा प्रयास होगा.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई समिति कर रही है जांच
अडानी समूह पर लगे आरोपों की जांच भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों का एक पैनल जांच कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा था कि अडानी के शेयरों में बेतहाशा उछाल के पीछे कोई नियामक विफलता या गलत काम नहीं है. फिर भी, अडानी समूह के खिलाफ शॉर्टसेलर के आरोपों की जांच पूरी करने के बाद अगस्त में भारत के प्रतिभूति प्रहरी से एक और फैसला आ सकता है. अडानी द्वारा पिछले साल होल्सिम एजी की सीमेंट कंपनी के अधिग्रहण ने अडानी समूह को निर्माण सामग्री में देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बना दिया था.
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