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भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में अडानी का बड़ा कदम: 15,000 MW मॉड्यूल तैनात और निर्यात
अडानी सोलर की 15,000 MW की सौर मॉड्यूल खेप ने भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को मजबूती दी है. यह उपलब्धि न केवल घरेलू उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार सृजन और कार्बन उत्सर्जन में कमी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रखती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनी अडानी सोलर ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुल 15,000 मेगावाट से अधिक सौर मॉड्यूल भेजकर भारत की पहली और सबसे तेज सौर मॉड्यूल निर्माता बनने की उपलब्धि हासिल की. इसमें से 10,000 मेगावाट मॉड्यूल भारत में तैनात किए गए, जबकि 5,000 मेगावाट विदेशों में निर्यात किए गए. यह खेप लगभग 2.8 करोड़ मॉड्यूल के बराबर है, जो 7,500 फुटबॉल मैदानों को कवर कर सकती है.
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खेप में लगभग 70 प्रतिशत मॉड्यूल अडानी के भारत-निर्मित सौर सेल का उपयोग करके बनाए गए हैं. यह कदम कंपनी की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल में योगदान को मजबूत करता है. अडानी सोलर अगले वित्त वर्ष तक अपनी उत्पादन क्षमता को 4,000 MW से बढ़ाकर 10,000 MW करने की योजना बना रही है और आने वाले वर्षों में 15,000 MW अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखती है.
वैश्विक स्तर पर पहचान
शोध फर्म वुड मैकेंजी ने अडानी सोलर को दुनिया के शीर्ष 10 सौर मॉड्यूल निर्माताओं में शामिल किया है और यह अकेली भारतीय कंपनी है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2025 तक 125 GW को पार करने की राह पर है, जो घरेलू मांग के लगभग तीन गुना है. अडानी सोलर 550 से अधिक जिलों में 35 चैनल पार्टनर्स के माध्यम से भारत का सबसे बड़ा सौर मॉड्यूल वितरण नेटवर्क संचालित करती है.
ग्रीन एनर्जी के लिए बड़ा योगदान
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि 15,000 MW का लक्ष्य अडानी सोलर की भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. इस खेप के प्रभाव में 50 लाख घरों को किफायती सौर ऊर्जा, 2,500 हरित नौकरियों का सृजन, सालाना 6 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और 65,000 किलोमीटर तक फैले मॉड्यूल शामिल हैं, जो पृथ्वी के 1.5 चक्र के बराबर हैं.
भारत का सौर उत्पादन तेजी से बढ़ा
भारत की सौर विनिर्माण क्षमता 2014 में 2.3 GW थी, जो अब 2025 तक लगभग 100 GW होने का अनुमान है. वर्तमान में 100 से अधिक घरेलू निर्माता सक्रिय हैं और देश ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है.
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