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भारत में SAF उत्पादन की दिशा में नया कदम: एयरबस और GSV का जॉइंट स्टडी एग्रीमेंट
इस सहयोग से SAF प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमता स्थापित होगी और भारतीय विमानन के लिए आत्मनिर्भर और स्थायी भविष्य की नींव रखी जाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
वैश्विक एयरोस्पेस उद्योग की अग्रणी कंपनी एयरबस (Airbus) और भारत के परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की प्रमुख उद्योग-उन्मुख विश्वविद्यालय गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) ने जॉइंट स्टडी एग्रीमेंट (JSA) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत वे कचरा सामग्री को सतत विमान ईंधन (SAF) में परिवर्तित करने पर केंद्रित एक व्यापक अनुसंधान और विकास कार्यक्रम शुरू करेंगे.
रणनीतिक साझेदारी से भारत में विमानन में स्थिरता को बढ़ावा
इस रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से एयरबस भारत में विमानन बाजार के डीकार्बोनाइजेशन को तेज करने और देश के सर्कुलर इकोनॉमी लक्ष्यों को समर्थन देने के अपने संकल्प को दर्शा रहा है. JSA का उद्देश्य GSV की अकादमिक और अनुसंधान क्षमता को एयरबस के वैश्विक उद्योग अनुभव के साथ जोड़कर नगर निगम के ठोस कचरे से SAF उत्पादन के लिए स्केलेबल, स्वदेशी समाधान तैयार करना है.
एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जुरगेन वेस्टरमेयर ने कहा, "गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ हमारी साझेदारी भारत में विमानन ईंधन के लिए एक स्थायी, सर्कुलर अर्थव्यवस्था बनाने में एक रणनीतिक निवेश है. यह JSA भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए स्थानीय रूप से SAF आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है."
GSV के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज चौधरी ने कहा, "एयरबस जैसी उद्योग की अग्रणी कंपनी के निरंतर सहयोग और भागीदारी के साथ, GSV भारत के विमानन क्षेत्र को और मजबूत करेगा."
अनुसंधान और संसाधनों का साझा उपयोग
इस समझौते के तहत एयरबस उन्नत अनुसंधान उपकरण, पायलट-स्केल प्रयोगशालाओं और विशेष अनुसंधानकर्ताओं की नियुक्ति के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा. साथ ही स्थानीय NGO अर्थ रक्षक फाउंडेशन को कचरा संग्रह और आपूर्ति के लिए समर्थन देगा.
एयरबस के सतत विमानन ईंधन और CO₂ हटाने प्रमुख जूलियन मानहेस ने कहा, "भारत के पास कृषि और नगर निगम कचरे से लेकर इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल तक विविध फीडस्टॉक उपलब्ध हैं, जिससे यह SAF उत्पादन के लिए वैश्विक केंद्र बन सकता है. इसकी तकनीकी प्रतिभा और नवाचार क्षमता इसे तेजी से कचरा-से-SAF तकनीक विकसित करने और स्केल करने में सक्षम बनाती है. स्थानीय SAF उत्पादन न केवल नई उद्योगों का निर्माण करेगा बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा स्वायत्तता में भी योगदान देगा."
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